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जलवायु परिवर्तन और भारत

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जलवायु परिवर्तन और भारत
COP29 Azerbaijan

Climate Change : बाकू में चल रहे कॉप 29 में, जो आज संपन्न हो जाएगा, भारत विकसित देशों के रवैये के खिलाफ लगातार मुखर तो है ही, इसी सम्मेलन में जारी जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (सीसीपीआइ, 2025) रिपोर्ट में पिछले साल की तुलना में तीन पायदान फिसलने के बावजूद भारत शीर्ष 10 देशों में बना हुआ है, जो एक उपलब्धि है. सीसीपीइ दरअसल उत्सर्जन, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु नीति के मामले में दुनिया के सबसे बड़े उत्सर्जकों पर नजर रखता है. और यह सूचकांक थिंकटैंक जर्मन वॉच, न्यू क्लाइमेट इंस्टिट्यूट और क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क इंटरनेशनल ने जारी की है, जो दुनिया के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जकों की प्रगति का आकलन करता है.

यूरोपीय संघ समेत 60 से अधिक देशों की सूची में भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने में इस बार तीन पायदान फिसला है, क्योंकि पिछले साल वह सातवें पायदान पर था. इसके बावजूद महत्वपूर्ण बात यह है कि अब भी भारत बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल है. प्रति व्यक्ति कम उत्सर्जन और नवीकरणीय ऊर्जा पर तेजी से अमल करने के कारण पहले से खराब प्रदर्शन के बावजूद भारत शीर्ष 10 देशों में शामिल है.

भारत में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 2.9 टन कार्बन डाइ ऑक्साइड समतुल्य (टीसीओटूइ) पर बना हुआ है, जो वैश्विक औसत 6.6 टीसीओटूइ से काफी कम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की जलवायु नीति में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना नहीं है और आबादी में वृद्धि के कारण जलवायु कार्रवाई को लेकर विकासोन्मुख दृष्टिकोण जारी रहने की गुंजाइश है. जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत के प्रदर्शन को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि 2014 में इस सूचकांक में 31 वें स्थान पर रहे भारत ने 2019 में शीर्ष 10 देशों में जगह बनायी, और तब से वह इस श्रेणी में बना हुआ है.

सीपीआइ-2025 में जिन देशों की जलवायु प्रगति का मूल्यांकन किया गया है, वे 90 फीसदी वैश्विक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं. सूचकांक में इस बार पहले तीन स्थान खाली हैं. चौथे पायदान पर डेनमार्क और फिर नीदरलैंड है. ग्रीनहाउस गैस के दो सबसे बड़े उत्सर्जक चीन और अमेरिका क्रमश: 55वें और 57वें-यानी सूचकांक में बहुत नीचे बने हुए हैं, तो ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और रूस भी फिसड्डी देशों की सूची में शामिल हैं. चूंकि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत लगातार सक्रिय है, ऐसे में, जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में उसका विकासशील देशों के पक्ष में बोलना और विकसित देशों के गैरजिम्मेदार रवैये के खिलाफ मुखर होना समझ में आता है.

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