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बच्चे और सोशल मीडिया

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बच्चे और सोशल मीडिया
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, फोटो-एआई

आंध्र प्रदेश और कर्नाटक अलग-अलग आयु समूहों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले दो भारतीय राज्य भले बन गये हैं, लेकिन यह ऐसा फैसला है, जिस पर पर्याप्त बहस की गुंजाइश है. प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य बच्चों पर मोबाइल और स्क्रीन टाइम के नकारात्मक प्रभाव को कम करना है. जहां टीडीपी के नेतृत्व वाली एनडीए शासित आंध्र प्रदेश सरकार ने कहा कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित रहेगा, वहीं कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने कहा है कि यह प्रतिबंध 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर लागू होगा.

हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण में कहा कि बच्चों की मानसिक सेहत, सीखने की क्षमता और डिजिटल लत को देखते हुए कड़े नियम जरूरी हो गये हैं. ऐसे ही, आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश का कहना था कि ‘सोशल मीडिया पर भरोसा टूट रहा है’ और ‘बच्चे निरंतर उपयोग में फिसलते जा रहे हैं’, इसलिए सरकार ने कानूनी विकल्पों का अध्ययन कराने का निर्णय लिया. केंद्र सरकार द्वारा इस साल संसद में पेश किये गये आर्थिक सर्वेक्षण में भी कहा गया है कि डिजिटल लत से बचने के लिए ऑनलाइन शिक्षण को कम करने के साथ-साथ ऑनलाइन मंचों तक आयु-आधारित पहुंच पर विचार किया जाना चाहिए.

ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं. ऑस्ट्रेलिया 2025 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना था. इंडोनेशिया ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है. हालांकि टेलीकम्युनिकेशन और आइटी चूंकि केंद्रीय विषय हैं, इसलिए बेहतर होता कि केंद्र सरकार संसद में बहस के बाद इस दिशा में कोई कदम उठाती.

इसके अलावा दूसरे देश अगर प्रतिबंध लगा रहे हैं, तो जरूरी नहीं कि अपने यहां भी प्रतिबंध लगाया जाये, क्योंकि हम सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से दूसरे देशों से अलग है. फिर सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाये जाने का इसलिए समर्थन नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका सब कुछ निंदनीय या त्याज्य नहीं है. प्रतिबंध कितना प्रभावी होता है, यह भी देखने वाली बात होगी, क्योंकि घरों में छोटे बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल वाकई करते हैं या नहीं, इस पर नजर रखने की कोई कारगर व्यवस्था नहीं है.

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