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चंद्रयान-5 को मंजूरी

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चंद्रयान-5 को मंजूरी
चंद्रयान-5

Chandrayaan-5 : चंद्रमा की सतह का अध्ययन करने से संबंधित महत्वाकांक्षी अभियान चंद्रयान-5 को केंद्र सरकार की मंजूरी स्वागतयोग्य है. यह मिशन 2040 तक भारत द्वारा चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष वी नारायणन के मुताबिक, सरकार ने 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे भारत को अंतरिक्ष में दीर्घकालिक शोध करने और वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी.

भारत के चंद्रयान मिशनों का लक्ष्य चंद्रमा की सतह का गहन अध्ययन करना है और इसरो अब तक तीन चंद्रयान मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है. वर्ष 2008 में लॉन्च किये गये चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर मौजूद रसायनों और खनिजों की खोज के साथ चंद्रमा की भू-स्थैतिक मैपिंग भी सफलतापूर्वक पूरी की थी. चंद्रयान-2 मिशन के तहत भेजा गया हाइ रेजोल्यूशन कैमरा आज भी चांद की तस्वीरें भेज रहा है. जबकि 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग कर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. उसके रोवर प्रज्ञान के जरिये चांद की सतह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटायी जा रही हैं.

चंद्रयान-3 अभियान में जहां 25 किलोग्राम का रोवर प्रज्ञान ले जाया गया था, वहीं चंद्रयान- 5 में 250 किलोग्राम का रोवर चंद्रमा की सतह का अध्ययन करेगा. प्रज्ञान से 10 गुना भारी और शक्तिशाली रोवर चंद्रमा की सतह पर अधिक डाटा संग्रह करेगा और विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण में मदद करेगा. इसमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पानी की उपस्थिति और इसके संभावित उपयोग की जांच की जायेगी. चंद्रयान-5 को जापान के साथ मिलकर पूरा किया जायेगा. जापान की अंतरिक्ष एजेंसी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी.

चंद्रयान-5 मिशन, जाहिर है, चंद्रयान-4 के बाद शुरू होगा, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र कर धरती पर लाना है. चंद्रयान-4 मिशन को केंद्र सरकार ने सितंबर, 2024 में मंजूरी दी थी और इसे 2027 में लॉन्च किये जाने की संभावना है. इस वर्ष शुरू होने वाले गगनयान मिशन 2028 में प्रस्तावित वीनस आर्बिटर मिशन जैसी परियोजनाओं के साथ नयी ऊंचाइयों को छू रहे भारत के अंतरिक्ष अभियानों से देश की वैज्ञानिक प्रगति होगी, साथ ही, वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी भारत निरंतर आगे बढ़ता जायेगा.

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