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Home Opinion Budget 2026 : मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करनेवाला बजट है

Budget 2026 : मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करनेवाला बजट है

Budget 2026 : मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करनेवाला बजट है
बजट भाषण देते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को लगातार नौवां बजट पेश किया. इसमें कोई संशय नहीं है कि वैश्विक मुश्किलों और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के कारण अनिश्चित वैश्विक बाजार एवं टैरिफ तथा बड़ी आर्थिक ताकतों द्वारा जरूरी मिनरल, सेमीकंडक्टर और कई दूसरी चीजों की सप्लाई सहित ग्लोबल वैल्यू चेन के हथियारीकरण की कोशिश तथा भुगतान प्रणाली के दुरुपयोग के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार चौथे वर्ष दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन अच्छी स्थिति में है.

हालांकि, रुपये का गिरता मूल्य, लगातार व्यापार और भुगतान घाटा तथा बढ़ते सार्वजनिक निवेश के साथ निजी निवेश बढ़ने की अनिश्चितता के कारण वित्त मंत्री के सामने बहुत सारी चिंताएं भी हैं. आर्थिक सर्वेक्षण ने अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश की, जिसमें चिंताओं को उठाया गया, विशेषकर रुपये की गिरती कीमत और एफडीआइ में लगातार आती कमी. सर्वेक्षण ने न केवल समाज के लिए, बल्कि युवाओं की डिजिटल लत से अर्थव्यवस्था को होने वाले खतरों और कई दूसरे मुद्दे भी उठाये.


जाहिर है, बजट में उन सभी पर बात नहीं हो सकी, पर बजट में नीति की दिशा एकदम साफ है और नीति यह है कि भारत न केवल वैश्विक उथल-पुथल से स्वयं को बचाने की कोशिश करेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को आगे भी ले जायेगा. न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूत बनायेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम खिलाड़ी भी बनेगा. बजट में सात रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने का प्रस्ताव है. लंबे समय से भारत सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मटीरियल, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल और कैपिटल गुड्स की सप्लाई के लिए विदेशों, खासकर चीन पर निर्भर रहा है.

इन सभी को बजट में जगह दी गयी है और इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने के लिए रणनीति भी बनायी गयी है. इससे न केवल चीन पर हमारी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, ग्लोबल वैल्यू चेन के हथियार बनने से भी अर्थव्यवस्था को बचाया जा सकेगा. ऐसा नहीं है कि भारत के पास रेयर अर्थ मटीरियल नहीं है, पर इस क्षेत्र में माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग में हम काफी पीछे हैं. ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों को डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने, माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बजट में मदद दी गयी है.


बजट में पेश की गयी कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट को बढ़ाने की योजना, हाइ वैल्यू टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड सीआइइ की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करेगी. कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की घोषणा के साथ कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 7,10,000 करोड़ का बजटीय आवंटन अहम कदम है. बायो फार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की बात भी बजट में है. बायो फार्मा, जिसमें बायो सिमिलर्स भी शामिल हैं, कई नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों के इलाज में क्रांति ला सकते हैं. टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक व्यापक प्लान, बजट में उठाया गया बड़ा कदम है.

‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ पहल से खादी और हैंडलूम को मजबूती मिलेगी. मध्यम, लघु एवं कुटीर उद्योगों को समर्थन देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन महत्वपूर्ण कदम है. बजट में पूंजीगत निवेश को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है, और प्रभावी पूंजीगत निवेश जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है, जो न सिर्फ अब तक का सबसे अधिक है, बल्कि यह राजकोषीय घाटे से भी ज्यादा है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. नये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और 20 नये राष्ट्रीय जलमार्ग हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे सकते हैं. प्रस्तावों का एक और अहम हिस्सा विकसित भारत के लिए प्रोफेशनल्स का सृजन है. स्वास्थ्य क्षेत्र में अगले पांच वर्षों में 1,00,000 एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स, 1.5 लाख केयर गिवर्स और 20,000 वेटरनरी प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित किया जायेगा.


किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से बजट में मत्स्य क्षेत्र की वृद्धि के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास, तटीय इलाकों में फिशरीज वैल्यू चेन को मजबूत करना, फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन के साथ स्टार्टअप्स और महिला समूहों को जोड़ना, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम लागू करना तथा लाइवस्टॉक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन जैसे उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को समर्थन की बात भी महत्वपूर्ण है. तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी फसलों के साथ उच्च मूल्य कृषि को बढ़ावा दिया जायेगा. पहाड़ी क्षेत्रों में बादाम, अखरोट और पाइन नट्स भी ग्रामीण आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

हम देखते हैं कि 7.4 प्रतिशत की विकास दर, दो प्रतिशत से कम महंगाई और लगातार घटता राजकोषीय घाटा संकेत देते हैं कि अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है. बजट में राजकोषीय घाटे को घटाकर 4.3 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है. कुल मिलाकर, बजट मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार वृद्धि को प्रोत्साहित करता दिखाई देता है. साथ ही, यह गांवों और किसानों को सशक्त बनाते हुए महंगाई को नियंत्रित रखने का प्रयास करता है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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