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जीएसटी सुधार का लाभ

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जीएसटी सुधार का लाभ
जीएसटी सुधार का लाभ

GST reforms : अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने और एच-1बी वीजा की फीस में अभूतपूर्व वृद्धि करने की पृष्ठभूमि में जीएसटी सुधार लागू होने की पूर्वसंध्या पर प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन महत्वपूर्ण था. उन्होंने घरेलू स्तर पर इन चुनौतियों का समाधान देने की कोशिश की है. उनका कहना था कि नवरात्रि के पहले दिन, सूर्योदय के साथ अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लागू हो जायेंगे. इन्हें सबसे बड़ा कर सुधार बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका फायदा देशवासियों को मिलेगा. गरीबों, मध्यवर्ग और नये मध्यवर्ग को दोहरा लाभ मिल रहा है.

जीएसटी कम होने से देश के लोगों के लिए अपने सपने पूरे करना आसान होगा, घरों से लेकर सपनों की चीजें खरीदने पर कम खर्च होगा और घूमना-फिरना सस्ता होगा, क्योंकि ज्यादातर होटलों के कमरों पर भी जीएसटी में कमी की गयी है. जीएसटी और टैक्स सुधारों के साथ प्रधानमंत्री ने स्वदेशी अपनाने पर भी जोर दिया. उनका कहना था कि हमें स्वदेशी चीजों के निर्माण के साथ-साथ देश में बनी चीजें खरीदने पर जोर देना होगा. राज्य सरकारों से भी उन्होंने अपील की कि केंद्र के साथ मिलकर वे स्वदेशी उत्पादों पर जोर दें, तो तस्वीर बदल सकती है. उन्हे कहा कि यह समय आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाने का है और देश को एमएसएमइ क्षेत्र से बहुत उम्मीद है. भारत में बने सामान से अपने गौरव को वापस पाना है.

हमारे लघु उद्योग वह बनायें, जो दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हों. पहले की तरह जनता से संवाद कर प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की मुहिम में उन्हें साझेदार बनने का आह्वान किया. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले कई बार राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं, चाहे वह नोटबंदी की सूचना देनी हो, बालाकोट हवाई हमले के बारे में बताना हो, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बारे में देशवासियों को सूचित करना हो, कोविड में लॉकडाउन लगाने और छूट देने की घोषणा करने के साथ टीकाकरण के लिए नागरिकों को प्रोत्साहित करना हो, तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने के बारे में देशवासियों को बताना हो या पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देनी हो.

प्रधानमंत्री के इस संबोधन के कई आर्थिक और राजनीतिक निहितार्थ हैं. जीएसटी सुधारों को उन्होंने स्वदेशी आंदोलन से जोड़ा. बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री के इस संबोधन का राजनीतिक महत्व है और यह सरकार की नीति, दृष्टिकोण और आगामी चुनाव के लिए उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है.

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