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उत्साहजनक सुधार

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उत्साहजनक सुधार

त्योहारी मौसम में अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में उत्साहजनक सुधार दिख रहा है. शेयर बाजार में तेजी, निर्यात में बढ़त, कर राजस्व में वृद्धि, बढ़ते औद्योगिक उत्पादन, महंगाई पर नियंत्रण और बैंकों पर फंसे कर्ज के हल्के होते बोझ के साथ-साथ कॉरपोरेट मुनाफे तथा यूनिकॉर्न में वृद्धि से अर्थव्यवस्था में एक सकारात्मक माहौल बना है. इन्हीं वजहों से वित्त मंत्री तीव्र विकास और दोहरे अंकों में वृद्धि का अनुमान जता रही हैं. महामारी से उबर कर उपभोक्ता मांग में सुधार हुआ है. वहीं खरीफ के बेहतर उत्पादन, विनिर्माण कार्यों और सेवा क्षेत्र में सुधार से उम्मीदें बढ़ी हैं.

खाद्यान्न कीमतों में नरमी और 2022 में हेडलाइन मुद्रास्फीति के 5.3 प्रतिशत तक लक्ष्य के करीब रहने से अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी. हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता, वैश्विक महंगाई के खतरों के प्रति पूरी तरह आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता. हाल में जारी भारतीय रिजर्व बैंक के आर्थिक गतिविधि सूचकांक के अनुसार, जुलाई-सितंबर, 2021 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 9.6 प्रतिशत रही. साल 2021-22 में खरीफ उत्पादन का नया कीर्तिमान बन सकता है, वहीं औद्योगिक उत्पादन 2019 के स्तर पर पहुंच गया है.

घरेलू और बाह्य मांग में मजबूती से वस्तुगत और सॉफ्टवेयर निर्यात भी बढ़ा है. प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि उनकी सरकार जिस सक्रियता से जुटी है, वह अभूतपूर्व है. बीते छह महीनों में यह दिखा भी है. गति शक्ति, संपत्ति मुद्रीकरण, एयर इंडिया की बिक्री, दूरसंचार में सुधार, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य, पूर्वप्रभावी कराधान में बदलाव और चुनिंदा उद्योगों के लिए उत्पादकता को बढ़ावा देने जैसी घोषणाएं ध्यातव्य हैं.

हालांकि, जरूरी नहीं कि सभी सरकारी योजनाएं कामयाबी के अंजाम तक पहुंचे, क्योंकि बीच में उन्हें नीतिगत कमजोरियों के मोर्चों से गुजरना है. दूसरा, आर्थिक गतिविधियों की तुलना 2020 के गिरावट वाले दौर से होने के कारण आंकड़े आकर्षक प्रतीत हो रहे हैं. भले ही 2021 के बाद 2022 में भी तेज वृद्धि का दावा किया जा रहा हो, लेकिन बीते चार वर्ष में औसत जीडीपी वृद्धि दर देखें, तो यह वैश्विक 2.6 प्रतिशत के सापेक्ष 3.7 प्रतिशत से अधिक नहीं है.

हालांकि, मौजूदा सकारात्मक रुख विकास गति में निरंतरता बनाने में सहायक होगा. इससे खपत पर खर्च बढ़ाने और कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. शुरुआती धीमेपन के बाद टीकाकरण कार्यक्रम सफलता की ओर बढ़ रहा है.

भले ही तीसरी लहर को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह तय होता जा रहा है कि अब संक्रमण पूर्व की भांति खतरनाक नहीं होगा. अर्थव्यवस्था के बड़े संकेतकों को बेहतर होने में अभी समय लगेगा. अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश की कमी, केंद्र और राज्यों का राजकोषीय घाटा, ऋण-जीडीपी का बड़ा अनुपात जैसी चिंताएं हैं. लेकिन, वर्तमान में ऊर्जा और आशावाद निश्चित ही आर्थिक वृद्धि के लिए सकारात्मक परिस्थितियों का निर्माण करने में सहायक होंगे.

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