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खाद्यान्न आपूर्ति में भारत

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खाद्यान्न आपूर्ति में भारत

बीते 15 वर्षों में पहली बार भारत 22 अरब राष्ट्रों की लीग के लिए सबसे बड़ा खाद्यान्न आपूर्तिकर्ता देश बन गया है. खाड़ी देशों द्वारा पिछले वर्ष आयात किये गये कुल कृषि व्यापार उत्पादों में भारत की हिस्सेदारी 8.25 प्रतिशत रही, जोकि ब्राजील की 8.15 प्रतिशत की हिस्सेदारी के बनिस्पत सर्वाधिक है.

अरब-ब्राजील चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुताबिक अरब जगत के लिए ब्राजील महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार रहा है, लेकिन दोनों के बीच भौगोलिक दूरी बाधक रही है. कोरोना महामारी में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान आया, जिससे खाद्यान्न उत्पादों को पहुंचाने में चुनौतियां पेश आयीं.

भारत अरब देशों को फलों, सब्जियों, चीनी, अनाज और मांस की आपूर्ति मात्र हफ्ते भर के समय में कर सकता है, वहीं ब्राजील को लगभग दो महीने का समय लग जाता है. शिपिंग मार्गों विशेषकर भारत, तुर्की, अमेरिका, फ्रांस और अर्जेंटीना से व्यवधान के चलते ब्राजील की व्यापार चुनौती बढ़ी है, जिसका फायदा भारत को मिला.

महामारी काल में चीन ने अपने खाद्यान्न भंडार की क्षमता में इजाफा किया, उससे भी ब्राजील का अरब के साथ व्यापार का कुछ हिस्सा बाधित हुआ. वहीं सऊदी अरब जैसे कुछ देश घरेलू स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहे हैं, साथ ही आयात के अन्य विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं. दुबई ने संयुक्त अरब अमीरात में खाद्यान्न कारोबार से जुड़ी कंपनियों से भारतीय किसानों को जोड़ने हेतु कृषि व्यापार प्लेटफॉर्मों की शुरुआत की है.

महामारी में जिस तरह आपूर्ति शृंखला बाधित हुई, उससे सबक लेते हुए खाड़ी देश खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने लगे हैं. दुबई के मल्टी कमोडिटीज सेंटर का प्लेटफॉर्म एग्रीयोटा व्यापार को सुगम बनाने की पहल का ही हिस्सा है. भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत से होनेवाले कृषि निर्यात में 2020-21 में बीते वर्ष के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि हुई है. यह बढ़ोतरी उस अवधि में हुई, जब भारत के सकल निर्यात में सात प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही.

साल 2020-21 में कृषिगत निर्यात में 32.5 बिलियन डॉलर तक विस्तार हुआ, जो 2012-13 के रिकॉर्ड निर्यात 32.7 बिलियन डॉलर के करीब रहा. कुल निर्यात में कृषि की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत से अधिक हो गयी है, जोकि उच्चतम स्तर पर है. यह भारतीय कृषि के लिए सुखद संकेत है. वर्तमान में विविध प्रसंस्करित खाद्यान्नों के विकास पर फोकस किया जा रहा है. साल 2022 में कृषि निर्यात के 60 बिलियन डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत सरकार विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है.

नतीजतन, कृषि एवं प्रसंस्करित खाद्यान्न के मूल्य में उत्साहवर्धक वृद्धि हुई है. यह उच्चतर आर्थिक वृद्धि और अच्छे मुनाफे के लिए बेहतर संकेत है. यह क्षेत्र भारत की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ किसानों की आय को दोगुना करने में सक्षम है, बशर्ते कि खाद्यान्न और संबंद्ध क्षेत्रों के लिए सुविधाओं, व्यापार छूट और निवेश प्रोत्साहन को सतत बढ़ावा दिया जाये.

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