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स्वच्छ ऊर्जा में उपलब्धि

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स्वच्छ ऊर्जा में उपलब्धि

भारत की स्थापित स्वच्छ ऊर्जा क्षमता 150 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है. सरकार द्वारा 2022 तक निर्धारित 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह शानदार प्रगति है. इसमें 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा, 60 गीगावॉट पवन ऊर्जा, 10 गीगावॉट छोटे स्तर पर पनबिजली और पांच गीगावॉट की बायोमास आधारित बिजली परियोजनाओं का लक्ष्य है.

बीते महीने नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने दावा किया था कि देश में 1522.35 मेगावॉट स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ोतरी हुई है. स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है. इस सेक्टर के विस्तार से अलग-अलग स्तरों पर रोजगार के मौके भी बनेंगे. विशेषकर, ग्रामीण भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

उम्मीद है अगले चार वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र 80 बिलियन डॉलर तक निवेश आकर्षित करेगा. इससे 2040 तक स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों पर हमारी निर्भरता आधे से अधिक हो सकती है. साथ ही, सौर ऊर्जा की मौजूदा लागत में भी गिरावट आयेगी. विकास की राह में आनेवाली अनेक बाधाओं को दूर करते हुए ऊर्जा लागत में कटौती भी करना है. साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की कोशिशें जारी रखना है.

दूसरे शब्दों में, हमें टिकाऊ विकास के विकल्प को ही अपनाना है. देश में 2035 तक आबादी लगभग 150 करोड़ होगी, लिहाजा ऊर्जा मांग में बढ़त स्वाभाविक है. बीते तीन दशकों में हमारा आर्थिक विकास औद्योगिक विस्तार और ढांचागत विकास पर निर्भर रहा है. वहीं व्यक्तिगत जीवन सुधार परिवहन, खाना पकाने के ईंधन, अरामदेह वातानुकूलन और आधुनिक ऊर्जा सेवाओं तक पहुंच पर निर्भर है. यानी, ऊर्जा आधारित सेवाओं की मांग बड़े और सूक्ष्म दोनों स्तरों पर बढ़ रही है.

भारत को स्वच्छ ऊर्जा से कार्बन आधारित ऊर्जा को प्रतिस्थापित करना होगा. इसके लिए भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा जैसे अन्य गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का रुख करना है. साथ ही उन्हें तकनीकी रूप से किफायती और सुलभ बनाने के लिए अधिक शोध करने की ‌आवश्यकता है. कृषि, आवास और परिवहन में ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की जरूरत है.

इसी के दृष्टिगत भारत ने पूर्व में म्यांमार, वियतनाम, पश्चिम में कजाकिस्तान, अनेक खाड़ी और मध्य एशियाई देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी की पहल की है. संघाई सहयोग संगठन की सदस्यता से भारत की ऊर्जा साझेदारी मामले में महत्वपूर्ण स्थिति बनेगी. वैश्विक ऊर्जा सेक्टर अक्षय ऊर्जा संसाधनों के विस्तार पर फोकस कर रहा है.

वहीं तेल उत्पादन में उथल-पुथल और प्राकृतिक गैस बाजारों में भी परिवर्तन आ रहा है. इस बदलाव के मद्देनजर भारत को शोध और कौशल विकास में क्षमता निर्माण करना होगा. साथ ही, पेरिस समझौते के संकल्पों को पूरा करने तथा समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक और दूरदर्शी पहल को आगे बढ़ाना होगा.

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