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ऐशो-आराम के लिए अपराध की राह

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राजधानी रांची में आपराधिक घटनाओं में लगातार इजाफा होता जा रहा है. दिन-ब-दिन लूट, हत्या, छिनतई जैसी घटनाएं आम हो गयी हैं. इन्हीं वारदातों में बाइकर्स गैंग के अपराधियों का आतंक भी है.
इसमें किसी खास आपराधिक गैंग के द्वारा घटनाओं को अंजाम नहीं दिया जा रहा है, बल्कि इसमें आम युवा शामिल हैं. शहर के युवा ऐशो-आराम के लिए मुख्य सड़कों, सूनसान इलाकों, भीड़भाड़ वाली जगहों और यहां तक कि कॉलोनियों की गलियों तक में वारदात को अंजाम दे रहे हैं. वारदात के बाद अपराधियों का बच कर निकल जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार बाइक पर सवार होना है.
वारदात के समय पीड़ित व्यक्ति ठीक ढंग से उसे पहचान नहीं पाते और अपराधी वारदात के बाद भागने में सफल हो जाता है. आज स्थिति यह है कि शहर के बाजारों, दुकानों और मोहल्ले की गलियों तक में महिलाएं और युवतियां शरीर पर गहने पहन कर आसानी से घूम नहीं सकती हैं.
उनमें बाइकर्स गैंग के बदमाशों का खौफ समाया हुआ है. हालांकि, शहर की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से जगह-जगह पर पुलिस की पीसीआर वैन, मोबाइल टाइगर और पुलिस के जवान तैनात किये गये हैं, लेकिन इन बदमाशों के आगे प्रशासन की चौकसी भी विफल साबित हो रही है. पुलिस-प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर वारदात को अंजाम देने में अपराधी सफल हो जा रहे हैं.
इस प्रकार की घटनाओं से शहर में असामाजिक तत्वों का मनोबल लगातार बढ़ता ही जा रहा है. कभी-कभार वारदात को अंजाम देते समय कोई अपराधी पकड़ा भी जाता है, तो थाने पहुंचने से पहले ही मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है. सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान देना होगा.
कुमारी ज्योति, खूंटी
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