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पुल से ज्यादा जजर्र सरकारी घोषणाएं

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पटना की हालत देखिए. हाजीपुर को जोड़ने वाला महात्मा गांधी सेतु जजर्र है. बड़े वाहनों पर रोक है. कुछ ऐसी ही स्थिति मोकामा के राजेंद्र पुल व आरा के कोइलवर पुल की है. पिछले तीन-चार सालों से यह हाल है.
बार-बार खबरें छपती हैं कि कभी भी राजधानी का संपर्क अन्य शहरों से कट जायेगा. इसके समाधान के लिए बार-बार होने वाली हवा-हवाई घोषणाओं से लोगों का विश्वास उठ चुका है. पटना के दीघा के निकट एक रेल-सड़क पुल पिछले दस सालों से बन रहा है. इस पुल को लेकर केंद्र से लेकर राज्य तक के अधिकारी यह दावा करते रहते हैं कि अगले तीन महीनों में यह चालू हो जायेगा.
सड़क पुल को लेकर बार-बार यह बताया जाता रहा है कि केवल पहुंच पथ नहीं बन पाया है. जबकि सच्चई कुछ और ही है. केंद्र, राज्य व रेल के अधिकारी इस पुल के मामले में सरासर झूठ बोल रहे हैं. इस सड़क-रेल पुल की हालत यह है कि अगर रात-दिन काम हो, तो भी यह पुल अगले छह महीने में शायद ही तैयार हो सके. इस पुल को लेकर बीती 11 जनवरी मतलब मात्र 11 दिन पहले रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने यह बयान दिया था कि अगर राज्य सरकार पहुंच पथ बनवा दे, तो पुल पर वाहनों का आवागमन शुरू हो जायेगा. यह बयान रेल राज्यमंत्री ने दीघा के निर्माणाधीन पुल के निकट खड़े होकर दिया था.
यह बयान उन्होंने कैसे दिया, यह जांच का विषय है क्योंकि सड़क पुल के स्लैब की पूरी ढलाई बाकी है. इसी तरह का मामला महात्मा गांधी सेतु को लेकर है. केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पटना आकर बयान दे दिया कि सेतु का जीर्णोद्धार केंद्र सरकार करवायेगी. अब तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ. राज्य व केंद्र का क्या झगड़ा है, इससे आम आदमी को क्या परेशानी है, इसे समझने को न अधिकारी तैयार है और न ही राजनेता. राजनेता वस्तुस्थिति को लेकर गलतबयानी करके अपनी गरिमा के साथ अपनी साख भी खो रहे हैं.
अगर, उनकी गलतबयानी के पीछे अधिकारियों की भूमिका है, तो ऐसे अधिकारियों की पहचान होनी चाहिए. उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. लेकिन इससे पहले राजधानी को अन्य शहरों से जोड़ने वाले पुलों को दुरुस्त करने का काम पूरी संजीदगी से शुरू करना चाहिए.
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