जम्मू-कश्मीर का जनादेश इस बार भी एक गठबंधन सरकार के पक्ष में आया. कश्मीर घाटी में मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को बड़ी कामयाबी मिली और जम्मू क्षेत्र में भाजपा को. लेकिन भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 44 प्लस का जो एजेंडा तय किया था, वह पूरा नहीं हुआ. घाटी और लद्दाख ने भाजपा की सियासत को पूरी तरह नकार दिया. भाजपा के दबदबे वाले जम्मू संभाग में कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी, तीनों को सीटें मिली हैं. लेकिन चुनावी नतीजे से सूबे में सत्ता-समीकरण की तीन-तीन तसवीर उभर रही है.
पहली, पीडीपी की अगुवाई वाली एक ऐसी सरकार की सूरत नजर आ रही है, जिसमें कांग्रेस और अन्य उसका साथ दें. दूसरी, पीडीपी अगुवाई वाली ऐसी सरकार की हो सकती है, जिसका भाजपा समर्थन करे या सरकार में शामिल हो. तीसरी, भाजपा-नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य की हो सकती है. सूबाई सियासत के मिजाज को देखें, तो पीडीपी-कांग्रेस और अन्य का समीकरण ज्यादा सहज और स्वाभाविक नजर आता है. लेकिन सियासत में हमेशा सहज और स्वाभाविक ही नहीं घटित होता!
