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Home Opinion गेहूं में बाजी मारी अब धान की बारी

गेहूं में बाजी मारी अब धान की बारी

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बिहार ने खेती के मोरचे पर अच्छी खबर सुनायी है. राज्य में यह पहला मौका है, जब गेहूं की खेती के लिए दूसरे राज्यों से बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मतलब गेहूं के बीज के मामले अपना राज्य स्वावलंबी हो गया है. यह बड़ी उपलब्धि है. चार साल से इस दिशा में काम करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक रोडमैप तैयार किया था. तय कार्यक्रम के तहत बीज के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया.
अब इसके नतीजे सामने आ रहे हैं. अच्छी बात यह है कि अगले साल का लक्ष्य यह है कि बिहार अब दूसरे राज्यों को भी गेहूं के बीज उपलब्ध करायेगा. कृषि विभाग की इस उपलब्धि का फायदा राज्य के किसानों को होगा. इस बार गेहूं के बीज की खरीदारी में किसानों को अधिक पूंजी नहीं लगानी पड़ेगा. नहीं, तो हर साल किसानों को खुले बाजार से बहुत ही ऊंची कीमत देकर गेहूं का बीज खरीदना पड़ता था. इस तरह किसानों का जो हर साल शोषण होता था, उससे थोड़ी मुक्ति मिलेगी, ऐसी उम्मीद जगी है. गेहूं का उत्पादन तो राज्य में बहुत नहीं होता है. इस कारण बहुत ही सीमित संख्या में ही किसान गेहूं के बीज की आत्मनिर्भरता का लाभ उठा पायेंगे. कृषि विभाग समेत कृषि अनुसंधान क्षेत्र के तमाम संस्थानों को गेहूं की तरह धान के बीज उत्पादन को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए. इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ होगा.
अभी हालत यह है कि करीब धान बोने वाले 85 प्रतिशत किसानों को खुले बाजार से धान का बीज खरीदना पड़ता है. चूंकि धान बोने वाले किसान पूरी तरह बाजार पर आश्रित है, तो इनका शोषण भी बहुत होता है. लुभावने सपने दिखाकर मनमानी कीमत पर धान का बीज खरीफ के सीजन में बिकता है. अभी तो स्थिति यह है कि हाइब्रिड बीज का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. देसी बीज का बाजार सिकुड़ रहा है.
हाइब्रिड बीज का नुकसान यह है कि इसमें पानी तो ज्यादा लगता ही है, साथ ही खाद व कीटनाशक पर भी किसानों को ज्यादा खर्च करना पड़ता है. इस तरह यह किसानों के लिए घाटे का सौदा होता है. अगर, राज्य में धान के बीजों का उत्पादन होने लगेगा, तो किसानों के लिए बहुत ही फायदा होगा. सरकार के साथ विभाग को भी इस दिशा में तेजी से काम करना चाहिए.
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