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Home Opinion भारत व बांग्लादेश की साझा चिंता

भारत व बांग्लादेश की साझा चिंता

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जिनेवा में इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन की बैठक में पहुंची लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन को बांग्लादेश की स्पीकर शिरीन शरमीन चौधरी ने भरोसा दिलाया है कि उनका देश भारत के खिलाफ चरमपंथी गतिविधियों के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा.
सितंबर में ढाका में भारत व बांग्लादेश के गृहसचिवों की एक बैठक हुई थी, जिसमें सीमा पर घुसपैठ, सीमा पार के अपराध तथा बांग्लादेश में छुपे भारतीय उग्रवादियों के प्रत्यर्पण के मसले शामिल थे. बांग्लादेश ने उस बैठक में भी भारत को यही भरोसा दिया था. चौधरी का वक्तव्य पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के बर्दवान में हुए बम-विस्फोट के आलोक में खास मायने रखता है.
जांच एजेंसियों का शुरुआती आकलन है कि विस्फोट में बांग्लादेशी अतिवादी शामिल हैं. विस्फोट में मारे गये आतंकियों का रिश्ता जमीयतुल मुजाहिद्दीन से माना जा रहा है, जिसे बांग्लादेश ने अस्थिरता फैलाने के आरोप में 2005 से ही प्रतिबंधित कर रखा है. विस्फोट की खबरों के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कूटनयिक संपर्क-सूत्र के सहारे भारत से कहा कि बम-विस्फोट से जुड़ी सूचनाओं को उसके साथ साझा किया जाये.
जाहिर है, भारत की तरह बांग्लादेश भी चिंतित है, क्योंकि उसे लगता है कि जमीयतुल मुजाहिद्दीन के साथ-साथ जमात-ए-इसलामी से जुड़े चरमपंथी सारधा चिटफंड के पैसे का इस्तेमाल बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने के लिए कर रहे हैं. भारत सरकार बांग्लादेश की ऐसी चिंताओं के निवारण के लिए कदम उठाने का वादा कर चुकी है. यानी बात सिर्फ भारत में अस्थिरता फैलाने की नीयत से बांग्लादेशी अतिवादियों की घुसपैठ तक सीमित नहीं, बल्कि बहुपक्षीय है.
बर्दवान विस्फोट के तथ्य इशारा करते हैं कि अतिवादियों के नेटवर्क का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय है और वे सीमावर्ती इलाकों का उपयोग छुपने के साथ-साथ धन उगाही और धन के हस्तांतरण के लिए भी करते हैं. उदारीकरण के दौर में देशों की सीमाएं सिर्फ बाजार के लिए ही नहीं, आतंकी गतिविधियों के लिहाज से भी लचीली हुई हैं. ऐसे में आर्थिक तरक्की के लिए जरूरी है कि जिन देशों की सीमाएं मिलती हैं, उनके बीच सुरक्षा-संबंधी पारस्परिक सहयोग और पुख्ता हो. बांग्लादेश के स्पीकर का बयान सहयोग की इसी जरूरत को रेखांकित करता है.
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