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भारत में छेड़ दी है शौचालय पर चर्चा

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भारत में छेड़ दी है शौचालय पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में बिल गेट्स ने लिखा ब्लॉग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली के बहुत से लोग प्रशंसक हैं. इनमें हर तबके के लोग हैं. देशी भी हैं, विदेशी भी. पूंजीपतियों को मोदी की आर्थिक नीतियां लुभा रही हैं, तो अर्थशास्त्रियों को उनका जमीनी सोच आकर्षित कर रहा है. दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति ने अपने ताजा ब्लॉग ‘मीटिंग दि न्यू प्राइम मिनिस्टर’(नये प्रधानमंत्री से भेंट) में मोदी की जम कर तारीफ की है.
बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने और खुले में शौच की बुराई को दूर करने की प्रतिबद्धता ने मुझको बेहद प्रभावित किया है. मोदी का यह काम अपने आप में काफी प्रेरणादायक है. उनके नेतृत्व में भारत वंचित और गरीब लोगों को इस तरह की सेवाएं देने के लिए आगे आया है.
मोदी ने भारत में शौचालयों पर चर्चा छेड़ दी है . यह ऐसा मुद्दा नहीं है, जिस पर बहुत से राजनीतिज्ञ बोलना पसंद करते हैं. लेकिन मेरा मानना है कि स्वतंत्रता के बाद किसी दूसरे नेता के मुकाबले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभालने के कुछ ही समय में शौचालयों की आवश्यकता के प्रति अधिक जागरूकता बढ़ायी है.
मैं पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी के साथ नयी दिल्ली में बैठक की थी. इस मुलाकात में मेरे साथ मेरी पत्नी मिलिंडा भी थीं. इस एक घंटे की मुलाकात में मोदी ने सबसे लिए शौचालयों के निर्माण, टीकाकरण, बैंक खातों और औषधालयों की योजना पर खुल कर चर्चा की. मुङो मोदी की गरीबों के प्रति इसप्रतिबद्धता को देख कर बड़ी खुशी हुई. उन्होंने भारत के लोगों में नयी उम्मीद जगायी है.
हम गरीबी से लड़ने और भारत के गरीब से गरीब लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाने की उनकी प्रतिबद्धता से प्रभावित होकर वहां से लौटे हैं. मोदी ने मुलाकात के दौरान मुझसे कहा था कि वह देश में साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं में सुधार की धीमी रफ्तार को लेकर असंतुष्ट हैं. इसे गति देने की पूरी कोशिश करेंगे. मोदी, देश में खुले शौच जाने की समस्या को 2019 तक समाप्त करना चाहते हैं. उन्होंने हमारे सामने इस समस्या के समाधान के लिए कुछ विचार भी रखे, जिसमें 500 शहरों में बस और रेलवे स्टेशन पर शौचालयों का निर्माण शामिल है.
मुङो यह सुन कर बड़ी खुशी हुई कि खुले में शौच के विषय में मोदी ‘बड़ी बेलाग और बेबाक’ बात करते हैं, जबकि अधिकांश बड़े लोग इसकी चर्चा कम ही करते हैं. जब आप यह सोचते हैं कि सभी नवप्रवर्तन भारत में ही होंगे, तो यह बड़े आश्चर्य की बात है कि देश में 63 करोड़ लोगों को खुले में शौच करना पड़ता है क्योंकि उन्हें कमोड की सुविधा नहीं है. विश्व भर में ऐसे मजबूर लोगों की संख्या 2.5 अरब है. मेरे संगठन बिल एंड मिलिंडा फाउंडेशन का एक बड़ा कार्यक्रम लोगों के लिए शौचालय की अच्छी सुविधाओं का सृजन भी है.
हमने भारत के प्रधानमंत्री के साथ इस बात पर भी चर्चा कि कि 21वीं सदी में ऐसे भी शौचालय बनाये जा सकते हैं जिनके लिए बड़े सीवेज सिस्टम और जलशोधन संयंत्रों की जरूरत नहीं पड़ेगी.
मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रगुजार हूं कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनजिंग की यात्र और जम्मू-कश्मीर की बाढ़ की वजह से अपने कार्यालय की व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने हमारे लिये समय निकाला. मोदी के साथ अपनी पहली मुलाकात में मैंने ये भी अनुभव किया कि वह लक्ष्य तय करने और लोगों से काम लेने के मामलें में काफी आक्रामक हैं. वह विभिन्न मंत्रियों से गहन मंत्रणाएं करते हैं और पूछते हैं कि आपने अपने 100 दिन के कार्यकाल में क्या किया, क्या आप अपने लक्ष्यों को और ठोस तथा अधिक महत्वाकांक्षी नहीं बना सकते.. सच कहूं, तो मैं नरेंद्र मोदी की कायशैली से बहुत प्रभावित हूं.
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