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प्रेम के प्रति संवेदनशीलता हो

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वेलेंटाइन डे का बहिष्कार करने से पहले हमें पश्चिमीकरण और संस्कृतीकरण के मध्य अंतर को समझना होगा. सामान्यतः वेलेंटाइन डे को प्रेमी जोड़ा अपने प्यार का इजहार करते हैं. लेकिन समाज का एक वर्ग इस चलन को स्वीकार नहीं करता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह भारतीय संस्कृति व परंपरा के विरुद्ध है.
अगर कुछ देर के लिए इसे अलग कर दें और संविधान पर नजर डालें, तो जीवन जीने के अधिकार में अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार भी अंतर्निहित है, बशर्ते दोनों वयस्क हों. ऐसे में प्यार के इजहार को रोकना मौलिक अधिकार का हनन करना है. परंतु प्रेम की आड़ में कुकृत्य और अपराध की अनुमति नहीं दी जा सकती है. प्यार के जाल में फंसा कर या शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना या फिर रिश्ता टूट जाने पर बेहद निजी फोटो का दुरुपयोग करना जैसे अपराध बड़ी संख्या में हो रहे हैं.
एक बड़ी चुनौती है, एकतरफा प्यार में लड़कियों पर एसिड अटैक करने या उन्हें अन्य तरह से परेशान करने जैसी घटनाओं को रोकना. इसके लिए स्कूली स्तर से ही बच्चों को मानसिक तौर पर तैयार करने की जरूरत है. आज भी हमारे समाज मे सेक्स एजुकेशन को वर्जना माना जाता है, जो ठीक नहीं है. इन पहलुओं पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए और किसी को भी प्रेमी जोड़ों को तंग करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए.
दीपक कुमार दास, बोकारो, झारखंड
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