[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Opinion वसंत का पता

वसंत का पता

0
मिथिलेश कु राय
युवा कवि
mithileshray82@gmail.com
बारिश तो हरेक जगह आकर खुद यह बताती है कि मैं आ गयी हूं. सर्दी और गर्मी इससे भी दो कदम आगे बढ़कर सबकी देह छू-छूकर यह कहती हैं कि मैं आ गयी हूं. लेकिन आपको यह कैसे पता चलता है कि वसंत आ गया है! जब सर्दी को उतरते हुए देखते हैं और जब धूप गुनगुनाने लगती है, तो क्या आप अंदाज लगाते हैं कि वसंत आ गया है?
भीड़ भरी बस में बैठकर जब आप जा रहे होते हैं, तो क्या आपको खिड़की से बाहर झांकने का मौका मिलता है? खिड़की से बाहर किस तरह के दृश्य होते हैं? क्या आपको सिर्फ भागती हुई गाड़ियां ही नजर आती हैं या कुछ पेड़ वगैरह भी दिखते हैं? आप वृक्षों को निहारते हैं? वृक्षों से आपको वसंत के आने का पता नहीं चलता होगा. वसंत का पता लगाने के लिए आम के वृक्षों के पास कुछ देर ठिठकना पड़ता है. उनके पल्लव पर अपनी निगाहें टिकानी पड़ती हैं. इतना समय किसके पास होता है कि आ रही मंजरियों को देखकर यह पता करे कि वसंत आ रहा है!
वसंत आने का पता आपको किसी और ही माध्यम से मिलता होगा. लेकिन इधर की बात अलग है. खेतों में बोये सरसों में निकल रहे फूलों से इस बात का पता चलता है कि वसंत आ गया है. सरसों के पीले-पीले फूलों को देखकर बगल के खेतों में बोये मटर में भी फूल खिलने को व्यग्र हो उठते हैं. तब तेजी से उनका रंग-रूप बदलने लगता है.
मटर की लताओं में जैसे ही फूल खिलने शुरू होते हैं, खेत में बोये फसलों में एक होड़ शुरू हो जाती है. देखते-देखते खेसारी, अलसी और राजमा भी अपने फूलों से दृश्य को सजाकर इतराने लगता है. इतना सुहाना माहौल देखकर गेहूं के पौधे का दिल खुशी से झूम उठता है और उनमें कलियां फूट पड़ती हैं. ये सारे मिलकर इस बात की जोर-जोर से मुनादी करते हैं कि वसंत आ गया है. इसी मुनादी को सुनकर धूप भी खिलने लगती हैं और पछिया मगन होकर डोलने लगती हैं.
तब चिड़िया खेतों में नृत्य करती हैं और वसंत आने का गीत गाने लगती है. यहां के कदम राह पर चलते हुए सहसा ठिठक जाते हैं और आम के वृक्ष के पास रुककर आंखों को उसे नेह से देखने का मौका देने लगते हैं. नेह भरी नजरों के सामने पल्लव में छुपे हुए मंजरियां आती हैं और जैसे कोई कान में कू कहता है न, वैसे ही वह कहता है कि वसंत आ गया है.
वसंत आने की सूचना यहां आम के पेड़ ऐसे भी देते हैं कि वह पहले से अधिक हरे-भरे हो जाते हैं. उनकी सुंदरता में चार चांद लग जाता है. वसंत का पता आपको कैसे चलता है? सहसा एक दिन आप चहक उठते हैं. देर तक आपको यह पता नहीं चल पाता है कि आप ऐसे ही क्यों चहक उठे हैं. फिर अचानक आपको यह याद आता है कि अखबार में आपने एक फोटो छपा देखा था. वह एक खेत का फोटो था जिसमें सरसों के पीले-पीले फूल खिले हुए थे. आपको उससे वसंत के आने की खबर मिली थी. इसी से आप चहक उठे थे!
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel