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अर्थव्यवस्था पर तैयारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीर्ष उद्योगपतियों के साथ अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और इसे बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की है. कुछदिनों से वे कई समूहों और कारोबारियों से मुलाकात कर रहे हैं. उन्होंने संबद्ध मंत्रियों व सचिवों के साथ सरकारी पहलों की समीक्षा भी की है. निश्चित रूप सेइन चर्चाओं के निष्कर्षों को बजट में शामिल किया जायेगा, लेकिन कवायद यह भी इंगित करती है कि अर्थव्यवस्था से संबंधित पहलें अब प्रधानमंत्री की सीधीनिगरानी में है. सरकार ने 2024 तक राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए आर्थिकी में तेज गति सेविकास जरूरी है.

परंतु अनेक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों से वृद्धि दर में लगातार कमी हो रही है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) मेंआर्थिक वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत के स्तर पर आ गयी थी, जो छह साल में सबसे कम है. पहली तिमाही में यह दर पांच फीसदी रही थी. विभिन्न आकलनों मेंकहा जा रहा है कि 2019-20 में वार्षिक विकास दर भी इसी आंकड़े के आसपास रहेगी. ऐसे अनुमानों और प्रधानमंत्री के जरूरी दखल के ठोस आधार हैं.

आर्थिकी के अहम क्षेत्रों में तीन महीनों से हो रहा संकुचन नवंबर में भी जारी रहा. आठ इन्फ्रास्ट्रक्चर उद्योगों में वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों(अप्रैल-नवंबर) में वृद्धि दर शून्य फीसदी रही है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह दर 5.1 फीसदी थी. औद्योगिक उत्पादन में अगस्त से हो रही गिरावटअक्तूबर में भी बरकरार रही.

संतोष की बात है कि अहम क्षेत्रों में आ रही कमी अक्तूबर के 5.8 फीसदी से घटकर नवंबर में 1.5 फीसदी तक आ गयी.लेकिन, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से हासिल राजस्व में कमी के साथ निवेश व मांग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने की वजह से चिंता बढ़ना स्वाभाविक है.

पिछले महीनों में सरकार ने कॉरपोरेट करों में कटौती की है और नये उद्यमों के लिए भी करों में छूट दी है. इन उपायों से निवेश बढ़ने की उम्मीद है. बैंकोंको पूंजी देने, ऑटो सेक्टर की सहायता करने, कर्ज में फंसी हुई पूंजी को निकालने आदि से जुड़ी राहतों से भी आर्थिकी में सुधार की अपेक्षा है. किंतुअर्थव्यवस्था का मुख्य आधार उपभोग है और उसकी बढ़ोतरी निवेश, खर्च और नगदी पर निर्भर है. ऐसे में प्रधानमंत्री की अगुवाई में संबद्ध संस्थाओं, समूहोंऔर औद्योगिक नेतृत्व से बातचीत का सिलसिला एक जरूरी कदम है. वे अब तक विभिन्न क्षेत्रों के 60 से अधिक कारोबारियों से मिल चुके हैं. वित्तीय घाटेको नियंत्रित रखने के लिए और कम राजस्व की वजह से अगर सरकार अपने खर्च में कमी करती है, तो उद्योग जगत निवेश को बढ़ाकर ठोस योगदान करसकता है. उनकी सलाह नीति-निर्धारण में भी मददगार हो सकती है. प्रधानमंत्री ने कहा है कि पांच ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य एक चरण है और उससे आगेअनेक मंजिलें हैं. आशा है कि मौजूदा कोशिशें उन मंजिलों की यात्रा का मजबूत आधार बनेंगी.

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