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किशोरावस्था से आगे यह सदी

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क्षमा शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार
kshamasharma1@gmail.com
लीजिये इक्कीसवीं सदी की किशोरावस्था अब खत्म हुई. अब वह उन्नीस साल की होकर बीसवें साल में प्रवेश करेगी, यानी अब उससे तर्कसंगत व्यवहार की उम्मीद होगी.
जब यह सदी शुरू हो रही थी, तो जोर-शोर से कहा जा रहा था कि यह सदी एशिया की सदी होगी, विशेष तौर से भारत और चीन की सदी होगी. ऑर्थर सी क्लार्क ने जब आनेवाले पचास साल की वैज्ञानिक खोजों की भविष्यवाणी की थी, तो वे इसी सदी की बात ही कर रहे थे. उसमें उन्होंने कहा था कि आनेवाले दिनों में हम अंतरिक्ष में बे रोक-टोक जाया करेंगे.
हम एलियनों को भी खोज लेंगे. हम और आगे बढ़ेंगे, तो किसी ग्रह पर हमें डायनासोर भी मिल सकते हैं. मनुष्य की औसत आयु बहुत बढ़ जायेगी. सोने का बना कोई ग्रह भी खोजा जा सकेगा. पिछली कितनी सदियों से हम सोने की खोज कर रहे हैं. सोने और अमृत को प्रयोगशालाओं में बनाने की बात कर रहे हैं और खजानों की खोज में दुनिया की खाक छान रहे हैं. अगर सोने का ग्रह मिल गया, तो इस इस सदी का नाम इतिहास में दर्ज हो जायेगा.
बहुत पहले की बात है. मैंने कहीं एक छोटी सी खबर पढ़ी थी कि वैज्ञानिकों ने एक सोने का ग्रह खोज निकाला है. हालांकि बाद में उसका कुछ पता नहीं चला. क्या पता किसी ने उस पर कब्जा कर लिया हो. इसी प्रकार डायनासोर का मिल जाना, एलियनों यानी दूसरे ग्रह के प्राणियों से मुलाकात अगर हो गयी, तो यह रोमांच भी इसी सदी के नाम होनेवाला है.
लेकिन, सवाल यही है कि आखिर कब यह सब होगा? किशोरावस्था में कोई मामूली सी उपलब्धि भी बहुत खुशी देती है, वह तो अब बीत चली. अब आनेवाले दिन, महीने, वर्ष जिनमें आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) से लेकर तमाम बातें हमारे घरों में जगह बनानेवाली हैं. उनमें मनुष्य के आपसी रिश्ते कैसे होंगे? यह सदी अपनी ही संतानों को किस रूप में देखेगी. क्या वे और भी अकेले होते जायेंगे?
क्या विज्ञान की उच्चतम खोजें इस सदी के मनुष्य को अच्छा इनसान बनने के लिए प्रेरित करेंगी? क्या दुनिया पर छाये परमाणु युद्ध और अब आये दिन होनेवाले धार्मिक युद्धों के बादल छंट जायेंगे और मनुष्य चैन की सांस ले सकेगा? इस सदी के सामने जितनी संभावनाएं हैं, चुनौतियां भी उससे कोई कम नहीं हैं.
एक तरफ विश्व ग्राम अवधारणा, तो दूसरी तरफ जमीन के छोटे से कतरे पर भी अपना हक. एक तरफ हर एक की बराबरी की बात, तो दूसरी तरफ अपनी विशिष्टता की पहचान और उसे बनाये रखने के लिए तक-कुतर्क सब जायज. आखिर यह सदी आनेवाले वर्षों में इन बातों से कैसे निपटेगी?
बढ़ता जल संकट, बढ़ते प्रदूषण, तमाम बीमारियां और उनके इलाज में काम आनेवाली दवाओं के प्रभाव का खत्म होते जाना, बढ़ती आबादी, बढ़ती बेरोजगारी, बढ़ता अहंकार इनसे निजात पाने के क्या तरीके ईजाद किये जायेंगे? इन सवालों के जवाब यह नया साल हमें बताये, तो बड़ी मेहरबानी!
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