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आर्थिकी में सुधार

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अनेक घरेलू और वैश्विक कारकों की वजह से हिचकोले खा रही अर्थव्यवस्था की बेहतरी की उम्मीद बढ़ रही है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दर 6.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, पर यह आशा भी जतायी है कि अगले साल यह दर सात फीसदी पहुंच जायेगी.

बैंकिंग सेक्टर पर गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के दबाव तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय सेक्टर में जोखिम बढ़ने के चिंताजनक रुझान से भारत में कारोबार बढ़ाने में निवेशकों की दिलचस्पी पर असर पड़ने की आशंकाएं पैदा हो रही थीं. परंतु, विश्व बैंक द्वारा जारी व्यापार सुगमता सूचकांक में भारत ने 14 पायदान की बड़ी छलांग लगाकर यह जता दिया है कि देश में निवेश फायदा का सौदा है. इस सूचकांक में भारत की स्थिति लगातार तीसरे साल बेहतर हुई है.

पिछली सूची में हमारा देश 77वें स्थान पर था और इस साल 190 देशों में उसे 63वां स्थान मिला है. भारत को उन 10 देशों में भी शामिल किया गया है, जहां व्यापारिक माहौल में सबसे ज्यादा सुधार हुआ है. साल 2014 में सत्ता संभालने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सुधारों का ठोस सिलसिला शुरू कर दिया था, जो अब भी जारी है. विभिन्न प्रावधानों और नियमन के जरिये पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में कारगर पहलें हुई हैं. कराधान प्रणाली को जटिलताओं तथा प्रशासनिक तंत्र को लाल फीताशाही से मुक्त कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है.

बीते कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाने के लिए अनेक घोषणाएं हुई हैं. इन वजहों से वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि में गिरावट के बावजूद भारत आज भी सबसे तेज गति से बढ़नेवाले देशों में है. विश्व बैंक की रिपोर्ट की यह बात भी महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम और व्यापार सुगमता पर सरकार के ध्यान से भारत की ठोस प्रगति को इंगित किया जा सकता है.

सरकार ने 2020 तक इस सूचकांक में शीर्ष 50 देशों में जगह बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. आर्थिक सुधारों से हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार तो मिला ही है, सामाजिक विकास व कल्याण योजनाओं ने भी सकारात्मक माहौल बनाने और लोगों के जीवन-स्तर को बेहतर करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है. आर्थिक विकास और सामाजिक विकास के संतुलन से ही किसी देश की प्रगति की वास्तविक तस्वीर बन सकती है. एक तरफ सरकार ने जहां वित्तीय संस्थाओं को पूंजी उपलब्ध कराने का निरंतर प्रयास किया है, वहीं कल्याण योजनाओं के लिए भी समुचित धन मुहैया कराने में कसर नहीं छोड़ी जा रही है.

ग्रामीण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए आगामी कुछ सालों में जहां 25 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश की योजना लागू की जा रही है, वहीं अगले तीन सालों में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार करने के लिए आठ लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. ऐसे में निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी के प्रति आश्वस्त होने के अनेक कारण हैं.

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