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प्रभावी आर्थिक पहलें

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भारतीय अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाने और गिरावट के दौर से बाहर निकलने की कोशिश में कुछ और ठोस सुधारों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो जायेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार चुनौतियों का सामना करेगी और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों को हर संभव मदद करेगी. कई घरेलू और बाहरी कारकों की वजह से हमारी आर्थिक वृद्धि की दर पिछले कुछ समय से कम हुई है तथा औद्योगिक, व्यावसायिक और वाणिज्यिक गतिविधियों में भी कमी आयी है. इस मुश्किल से निबटने की दिशा में सरकार पहले अनेक अहम घोषणाएं कर चुकी है. चूंकि वर्तमान समस्या के अनेक पहलू हैं, इसलिए सरकार भी बहुआयामीय पहलकदमी कर रही है.

मौजूदा माहौल में जहां कॉर्पोरेट जगत और आम परिवार अपनी खर्च योजनाओं के हिसाब से नहीं चल पा रहे हैं, सरकार ने सार्वजनिक खर्च, खास कर वित्तीय खर्च, बढ़ाने का फैसला लिया है. इस वर्ष जुलाई के महीने में बजट खर्च में जुलाई, 2018 की तुलना में 24 फीसदी की बढ़ोतरी की है. यह बढ़त पिछले साल जुलाई में 15.5 फीसदी रही थी. वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक खर्च को बढ़ाने में अहम इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालयों और सक्षम सरकारी उपक्रमों से भी अधिक खर्च करने का आग्रह किया है.
इससे बाजार में नकदी की कमी दूर करने और मांग बढ़ाने में जरूरी मदद मिलेगी. घरेलू बाजार में मांग में बड़ी कमी की वजह से मंदी का माहौल है और इसका नकारात्मक असर उत्पादन और रोजगार पर पड़ रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार के बजट वित्त खर्च में लगभग 10 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
इस वृद्धि के साथ यह राशि 3.36 लाख करोड़ हो जायेगी, जो पिछले साल 3.03 लाख करोड़ रही थी. इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 4.5 लाख करोड़ के निवेश की अपेक्षा है, जो गत वर्ष से 3.2 फीसदी अधिक होगी. रिजर्व बैंक से अधिशेष स्थानांतरण के रूप में मिले 58 हजार करोड़ रुपये से भी निवेश उद्देश्यों को पूरा करने में सहयोग मिलेगा. सरकारी निवेश बढ़ाने की जरूरत में राज्य सरकारों से भी हाथ बंटाने की आशा है.
नीति आयोग के मुख्य अधिशासी अधिकारी अमिताभ कांत ने सही ही कहा है कि भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में राज्यों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है तथा उन्हें एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और साझेदारी में काम करने की जरूरत है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस के आकलन के अनुसार, मौजूदा रुझानों से बाहर निकलने के लिए सार्वजनिक निवेश में 17 राज्य करीब 5.74 लाख करोड़ का योगदान कर सकते हैं, जो पिछले साल से 36 फीसदी ज्यादा है.
अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल से फिलहाल भारत की आर्थिकी की अपेक्षित लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है. निर्यात में ठहराव इसे साफ इंगित करता है. अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने कहा है कि चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध से भारत को बहुत ज्यादा फायदा नहीं होगा. ऐसे में अर्थव्यवस्था को पटरी पर बनाये रखने के लिए सार्वजनिक खर्च में बढ़ोतरी के सरकारी कोशिशें सराहनीय हैं.
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