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जीएसटी से राजस्व में वृद्धि

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डॉ अश्वनी महाजन
एसोसिएट प्रोफेसर, डीयू
ashwanimahajan@rediffmail.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जुलाई, 2019 को एक ट्वीट कर सफल जीएसटी के दो वर्ष पूरे होने पर उन सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया, जिन्होंने ‘एक राष्ट्र-एक टैक्स’ के सपने को पूरा करते हुए, इस महत्वपूर्ण टैक्स सुधार को लागू करने और इसे लोक हितकारी बनाने में मदद की. उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी सहकारी संघीय व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है.
कई वर्षों तक चर्चा के बाद 1 जुलाई, 2017 को भारत में जीएसटी लागू कर दिया गया. जीएसटी यानि वस्तु एवं सेवा कर. केंद्र और राज्यों के 17 अप्रत्यक्ष कर एक ही कर में विलीन हो गये. भारत में अप्रत्यक्ष करों का ढांचा पेचीदा रहा है.
संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच आर्थिक शक्तियों के बंटवारे के चलते कई अप्रत्यक्ष कर जैसे बिक्री कर, मनोरंजन कर, स्टांप ड्यूटी, बिजली, माल और परिवहन आदि पर कर लगाने का अधिकार राज्यों के पास रहा, जबकि सीमा कर, शराब और कुछ स्थानीय स्तर पर बननेवाले उत्पादों को छोड़कर शेष सभी उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने का अधिकार केंद्र के पास रहा. जीएसटी लागू होने से पहले 15 वर्षों से केंद्र सरकार सेवा कर भी लगा रही थी.
जीएसटी उपभोग आधारित कर है. यह अंतिम पड़ाव के सिद्धांत पर आधारित है. जहां वस्तु और सेवा का अंतिम पड़ाव यानि उपभोग होता है, वहीं पर यह कर लगता है.
हालांकि, वस्तु और सेवा के उत्पादन (मूल्य संवर्धन) के हर स्तर पर जीएसटी वसूला जाता है और हर अगले पड़ाव में पिछले पड़ावों पर दिये गये कर को टैक्स क्रेडिट के रूप में लिया जाता है. पूर्ति की कड़ी के अंतिम पड़ाव यानि उपभोक्ता से पूरा जीएसटी वसूला जाता है और वह राजस्व में जमा किया जाता है.
लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी लागू है, लेकिन राज्यों के दबाव के चलते पेट्रोलियम, शराब, तंबाकू और रियल इस्टेट में स्टांप ड्यूटी अब भी जीएसटी के अंतर्गत नहीं हैं. वर्तमान में जीएसटी की चार दरें हैं- 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत. पिछले साल दिसंबर तक 97.5 प्रतिशत वस्तुओं पर 18 प्रतिशत या उससे कम जीएसटी लगाया जाता रहा है और 28 प्रतिशत जीएसटी लगनेवाले उत्पादों की संख्या में लगातार कमी आती रही है.
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसार जीएसटी लगने से पहले ‘वैट’ और इसके अलावा भी कई कर लगने के कारण कुल अप्रत्यक्ष कर 31 प्रतिशत तक पहुंच जाते थे. आज जहां अधिकांश वस्तुओं पर जीएसटी 18 प्रतिशत या उससे कम है, इसके कारण उपभोक्ताओं पर कर का बोझ पहले से काफी कम हो गया है.
जीएसटी लागू होने से पहले व्यापारियों को विभिन्न कर विभागों के कानूनों एवं नियमन से जूझना पड़ता था, जबकि अब उनके करों का अनुपालन अत्यंत आसान हो गया है. इसके कारण जीएसटी लागू होने से पहले जहां मात्र 65 लाख लोग ही अप्रत्यक्ष कर देते थे, अब यह संख्या 120 लाख पहुंच गयी है, यानि 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. जुलाई 2017 से मार्च 2018 के 8 महीनों में जीएसटी से औसत राजस्व प्राप्ति 89,700 करोड़ रुपये रही.
वर्ष 2018-19 में जीएसटी की मासिक राजस्व प्राप्ति 97,110 करोड़ रुपये दर्ज की गयी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा थी. यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद पहले की अपेक्षा अब ज्यादा लोग कर देने लगे हैं. और कर की दर पहले की अपेक्षा कम होने के बावजूद ज्यादा कर इकट्ठा होने लगा है.
जीएसटी एक मूल्य वृद्धि कर होने के कारण हर स्तर पर पूर्व में लगे जीएसटी का क्रेडिट अगले क्रेता को मिल जाता है. इसके कारण कीमत पर बेजा प्रभाव नहीं पड़ता. इसलिए ऐसा समझा जाता है कि जीएसटी से कीमतों में कमी होगी.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके पीछे एक कारण यह है कि कंपनियों ने टैक्स कम होने का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं पहुंचाया. ऐसे मसलों से निपटने के लिए जीएसटी काउंसिल ने एंटी प्रोफिटियरिंग अथॉरिटी का गठन किया, जिसके दो वर्ष पूरे होने पर उसे आगे और दो वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है. अथॉरिटी ने टैक्स कम होने पर भी कीमतें न घटाने के कारण कई कंपनियों पर जुर्माना लगाया है.
अर्थशास्त्र के सिद्धांत के अनुसार, जीएसटी की कुशलता उसकी एक दर के कारण है. ज्यादा दरें होने की वजह से जीएसटी का आकलन कठिन होता है.
लेकिन, भारत जैसे विशाल देश में एक दर इसलिए संभव नहीं, क्योंकि गरीबों द्वारा उपयोग की जानेवाली वस्तुओं पर ज्यादा कर लगाने से समानता का लक्ष्य प्रभावित होता है, क्योंकि गरीब और अमीर पर एक जैसा कर लगाना समता के आाधार पर सही नहीं. फिर भी करों की संख्या में कमी करना संभव है. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि भविष्य में 12 और 18 प्रतिशत की कर दरों को साथ मिलाकर एक दर बनायी जा सकती है. ऐसे में जीएसटी प्रणाली में कुशलता लाना ज्यादा आसान होगा.
जीएसटी में सुधार जारी है. जीएसटी काउंसिल की अभी तक की हुई 35 बैठकों में जीएसटी नियमों में 90 परिवर्तन हो चुके है. एक नयी जीएसटी रिटर्न भरने की व्यवस्था लायी जा रही है, जिससे व्यापारियों को महीने में एक ही बार फाॅर्म भरना होगा, जिससे वे कई फाॅर्म की जहमत से बच जायेंगे. यह व्यवस्था अक्तूबर 2019 से लागू हो जायेगी. राज्यों को भी जीएसटी लागू होने के बाद खासा फायदा पहुंचा है, और 20 राज्यों के राजस्व में न्यूनतम 14 प्रतिशत वृद्धि हुई है.
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