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एआइ पर जोर

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कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक का नया आयाम है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ). मनुष्य और मशीन की बढ़ती साझेदारी के साथ इस अत्याधुनिक तकनीक को प्रयोगशालाओं से निकालकर रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल करने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं.

नीति आयोग ने इस संबंध में एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. रिपोर्टों के अनुसार, इस संस्था ने सरकार के सामने क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म और शोध संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा है.
इसमें शुरुआती तीन सालों में 7,500 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा. प्रारूप में पांच क्षेत्रों- शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शहरीकरण एवं गतिशीलता- को चिह्नित किया गया है, जिनके लिए एक उच्च स्तरीय कार्य-बल की निगरानी में पांच शोध संस्थाओं और 20 केंद्रों में एआइ तकनीक पर काम होगा.
इस योजना पर अगर समुचित रूप से अमल हुआ, तो 2035 तक हमारी अर्थव्यवस्था में 957 अरब डॉलर की राशि जुड़ सकती है तथा वृद्धि दर में 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. वर्ष 2018-19 के बजट में सरकार ने एक राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने का जिम्मा नीति आयोग को दिया था. इसी के अनुरूप पिछले साल जून में यह संस्था एआइ के बारे में एक रणनीतिक मसौदा जारी कर चुकी है.
उम्मीद है नयी सरकार जल्दी ही इसे मंजूरी दे देगी, क्योंकि दुनिया के अनेक देश इस तकनीक को अपनाने की होड़ में लगे हैं. चीन ने एआइ के घरेलू उद्योग को स्थापित करने के लिए कुछ सालों में 150 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनायी है. उसका लक्ष्य एक दशक में इस क्षेत्र में अग्रणी होने का है. हमारे देश के बैंकिंग सेक्टर में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है.
नेशनल बिजनेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन के अनुसार, 32 फीसदी से अधिक वित्तीय संस्थाएं एआइ का इस्तेमाल कर रही हैं. इससे सेवा को बेहतर और सुरक्षित बनाने के साथ बैंकिग के समावेशीकरण में भी मदद मिल रही है. इसी महीने केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के लिए एआइ परियोजनाओं पर काम करना अनिवार्य बना दिया है.
यह अत्याधुनिक तकनीक के जरिये रक्षा क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है. अर्थिक प्रगति के बावजूद हमारे देश में गरीबी, अशिक्षा, बीमारी आदि जैसी बड़ी चुनौतियां हैं. इनका सामना करने में एआइ एक कारगर हथियार हो सकता है. ऐसे संकेत हैं कि निजी क्षेत्र भी इसमें निवेश बढ़ाने की ओर अग्रसर है. लेकिन, इससे जुड़े कुछ सवालों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.
एआइ, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन जैसे तकनीक रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं. ऐसे में युवाओं को इन तकनीकों के विकास और उपयोग के लिए कौशल एवं प्रशिक्षण देने की व्यवस्था होनी चाहिए. इससे रोजगार भी उपलब्ध होगा और एआइ उद्यम भी बढ़ेगा. सूचना क्रांति के दौर में भारत ने दुनिया को बेहतरीन विशेषज्ञ और सॉफ्टवेयर मुहैया कराया था. एआइ के क्षेत्र में उस कामयाबी को दोहराने का फिर मौका है.
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