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महानता के सीजन

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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
puranika@gmail.com
एक राज्य सरकार ने अपनी पाठ्य पुस्तकों में महाराणा प्रताप की महानता कम कर दी है, अकबर की बढ़ा दी है. वीर सावरकर के बारे में बताया गया है कि उन्हें सावरकर माना जा सकता है, पर वीर नहीं. ऊपर कहीं ये महान आत्माएं बात करती होंगी, तो कुछ यूं वार्तालाप होता होगा-
हां भई सावरकरजी, अब कहां-कहां महान हो? देखिये उन राज्यों में महान ना बचे. पर कुछ नये राज्यों में शायद महान घोषित हो जायें.हां, भई वक्त बहुत पेचीदा हो गया है. महाराणा प्रताप भी अब कुछ कम महान रह गये हैं. हां उस राज्य में ढुढुमल खोपटिया नये महान हो गये हैं. सुना है कि खोपटियाजी के वंशजों ने बहुत भारी रकम चंदे में उस राजनीतिक दल को दी है, तो खोपटिया महान घोषित हो गये हैं. खोपटिया के वंशजों के पास बहुत पैसा है देने के लिए, तो वह महान हो लिए.
नहीं ऐसा नहीं हो सकता है, आखिर तो महाराणा प्रताप महान थे. वैसे महाराणा प्रताप में यह क्षमता तो अब भी है कि वे वोट दिलवा सकें. इसलिए उन्हें सिलेबस से ना हटाया जा सकता, हां उनकी महानता कम की जा सकती है.तो क्या भविष्य में इस तरह के चुनावी वादे संभव हैं कि अगर हमारी सरकार आयी, तो हम चुन्नुमल खोपटिया को सौ पाॅइंट का महान घोषित कर देंगे, बाकी सबको बाहर कर देंगे सिलेबस से? महानता के पाॅइंट घोषित होंगे- सौ पाॅइंट के महान, पचास पाॅइंट के जूनियर टाइप के महान.
महानता पर गर्व नहीं करना चाहिए, सब कुछ अस्थायी है. आज महाराणा महान हैं, कल खोपटियाजी महान होंगे. फिर कोई सरकार आकर महापुरुष विनिवेश मंत्रालय खोल सकती है. जो पुराने महापुरुषों का विनिवेश कर देगा. पुराने महापुरुष कबाड़ के भाव निकाल दिये जायें, नये खोपट, पोपट भर्ती किये जायें.
महानता के सीजन हैं, कोई कभी महान है, कोई कभी महान है. सार्वकालिक महानता के दौर गये. नेहरूजी ऊपर से देखते होंगे कि हाय नीचे क्या-क्या मेरे नाम में लगाया जा रहा है. गांधी उन्हें तसल्ली देते होंगे- चिंता ना करें, सैकड़ों भ्रष्ट नेता, महाभ्रष्ट संस्थान मेरे नाम पर चल रहे हैं, सब कमा खा रहे हैं, मैं कुछ ना कर सकता. आप भी शांत होकर बैठिये.
महानता शेयर बाजार के भावों की तरह हो गयी है- कुछ वक्त बाद महानता की रिपोर्ट बाजार रिपोर्ट की तर्ज पर आने लगे कुछ इस तरह से- आज उस पार्टी के चुनाव जीतने के बाद चुन्नूमल खोपटिया की महानता के भाव ऊंचे बोले गये. महात्मा गांधी की महानता के भावों में कुछ नरमी देखी गयी.
महात्मा गांधी के नाम पर चलनेवाले करीब पांच हजार संस्थानों में इतने हजार में निकम्मेपन और भ्रष्टाचार की जांच चल रही है. नये उभरते महानों में खटियामल जोड़ू के भाव बढ़ने की उम्मीद है, आप जोड़-तोड़ गठबंधन के उस्ताद हैं. खैर, अब तो महानता पर गर्व करने के दिन गये. बिग बाॅस की तरह महानता के भी सीजन आने लगे हैं!
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