विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई को भले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी भलमनसाहत कहा हो, पर उनका और उनकी सेना का इरादा भारत के साथ अमन-चैन से रहने का कतई नहीं है. जम्मू-कश्मीर से लगी नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी सेना की लगातार गोलाबारी यही इंगित करती है. पुलवामा की घटना के बाद अहम देशों और वैश्विक मंचों से भारत को मिला व्यापक समर्थन उसे रास नहीं आ रहा है.
पाकिस्तानी धरती पर बने आतंकी गिरोह जैशे-मोहम्मद के ठिकाने को निशाना बना कर भारत ने यह भी जता दिया है कि उसके सब्र का बांध टूट चुका है. बौखलाहट में जब पाकिस्तान ने लड़ाकू विमानों के जरिये घुसपैठ की कोशिश की, तो उसे करारा जवाब मिला. विंग कमांडर अभिनंदन के मामले में भी उसे भारतीय कूटनीति क्षमता और अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने झुकना पड़ा. पाकिस्तान को यह बखूबी पता है कि न तो युद्ध में और न ही कूटनीति में वह भारत का सीधा सामना कर सकता है. ऐसे में उसके पास आतंक, घुसपैठ और युद्धविराम के उल्लंघन की पुरानी नीति पर लौटना पड़ा है.
