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ड्राइवर को छुट्टी नहीं दी, एक वोट से हार गये

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ड्राइवर को छुट्टी नहीं दी, एक वोट से हार गये

अनुज कुमार सिन्हा

राेमांचक चुनावी मुकाबले की कमी नहीं है. जब यह हार मात्र एक वाेट से हाेती है, ताे इसे पचाना आसान नहीं हाेता. तब पता चलता है कि एक वाेट का महत्व क्या हाेता है. ऐसा भी हुआ है कि कुछ लोगों ने यह सोच कर वोट नहीं दिया कि एक वोट से क्या फर्क पड़ जायेगा, बाद में पता चला कि उनके उम्मीदवार मात्र एक वोट से चुनाव हार गये.

2004 कर्नाटक विधानसभा चुनाव

सैंथेमराहल्ली विधानसभा क्षेत्र से इस चुनाव में कांग्रेस के आर ध्रुवनारायण ने जेडीएस प्रत्याशी एआर कृष्णामूर्ति काे सिर्फ एक मत से हराया था. ध्रुवनारायण काे 40752 वाेट और कृष्णामूर्ति काे 40751 वाेट मिले थे. किस्मत ने कृष्णामूर्ति का साथ नहीं दिया था. उनके ड्राइवर ने वाेट देने की लिए छुट्टी मांगी थी, लेकिन कृष्णामूर्ति ने छुट्टी नहीं दी और ड्राइवर वाेट नहीं कर सका था. ड्राइवर का यही एक वाेट निर्णायक हुआ.
तीन उम्मीदवारों के टाइटल थे एक
एआर कृष्णामूर्ति के साथ-साथ इस चुनाव में बीएसपी के सीएम कृष्णामूर्ति और जनता पार्टी के एमएस कृष्णामूर्ति भी मैदान में थे. छह में से तीन प्रत्याशियाें के टाइटल कृष्णामूर्ति रहने का भी असर पड़ा था और एक वाेट से हार-जीत का फैसला हुआ था.
मां-पत्नी और ड्राइवर जाम के चलते वोट नहीं दे सके, एक वोट से हारे जोशी.
नाथद्वार विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और बड़े नेता सीपी जाेशी एक वाेट से चुनाव हार गये थे. जीत मिली थी भाजपा के कल्याण सिंह चाैहान काे. सीपी जाेशी काे मुख्यमंत्री का दावेदार भी माना जा रहा था. उन्हें कुल 62215 वाेट मिले थे, जबकि कल्याण सिंह काे 62216 वाेट. एक घटना सीपी जाेशी जिंदगी भर भूल नहीं सकते हैं.
चुनाव के दिन वाेट देने के लिए सीपी जाेशी की मां, पत्नी और ड्राइवर तीनाें कार से मतदान केंद्र की ओर जा रहे थे. रास्ता जाम और भीड़ अधिक हाेने के कारण तीनाें यह साेचकर घर लाैट आये कि जीत ताे तय है ही, तीन वाेट नहीं भी पड़े, ताे क्या फर्क पड़ेगा. जब रिजल्ट आया ताे सीपी जाेशी एक वाेट से हार गये थे. अगर इन तीनाें में से एक भी वाेट देने पहुंच गया हाेता, ताे स्थिति अलग हाेती.
इसी चुनाव ने यह भी साबित कर दिया कि पाेस्टल वाेट का कितना महत्व हाेता है. मतदान केंद्राें में मिले वाेट में सीपी जाेशी आगे थे, लेकिन पाेस्टल वाेट उन्हें सिर्फ 122 मिले थे, जबकि कल्याण सिंह काे 217 यानी 95 पाेस्टल वाेट ज्यादा.और हार-जीत का फैसला हुआ ताे सिर्फ एक वाेट से. काश, एक पाेस्टल वाेट उन्हें और मिल गया हाेता या पत्नी, मां या ड्राइवर में से काेई एक वाेट कर पाता.
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