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इंस्टाग्राम पर सिसेरिस

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आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

puranika@gmail.com

घणा इश्तिहार था. लिखा था कि सिसेरिस बहुत ही पौष्टिक आइटम है. उस कंपनी ने बताया कि फोटू देखने के लिए इंस्टाग्राम पर आइए, उस कंपनी का सिसेरिस फेसबुक पर भी है और ट्विटर पर भी. सिसेरिस को इस एंगल से देखिए, उस एंगल से भी देखिए, बहुत ही क्यूट है सिसेरिस. ब्राऊन रंग और पीले रंग का कांबिनेशन है सिसेरिस. ऐसा है सिसेरिस कि इसे खाने से वजन भी कम होने लगता है. तीन हजार रुपये किलो ओनली! आॅर्डर करें, फलां वेबसाइट पर.

मैं महाप्रतापी सिसेरिस की खोज में निकला और खूब शोध के बाद पता चला कि इस आइटम को तो हम चना कहते हैं. इंग्लिश में इसे चिकपी कहते हैं और लैटिन में सिसेरिस. विदेशी भाषा में बेवकूफ बनाना घणा आसान होता है.

चने से इंप्रेस ना हो रहे हों, तो लो जी सिसेरिस. हिंदी में चना तीन हजार रुपये किलो बेचना मुश्किल है. इंग्लिश भी पब्लिक अब समझने लगी है.

सो अब लैटिन में समझाकार तीन हजार रुपये किलो चना बेचना आसान हो गया है. सिसेरिस होकर चना तीन हजार रुपये किलो हो लिया और अब लोकल ठेले पर नहीं है, इंस्टाग्राम में देखिए. भाषाएं ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए नहीं, बेवकूफ बनाने के लिए भी प्रयुक्त हो रही हैं.

लागरायुक्त सिसेरिस- हेल्थ के लिए बहुत ही शानदार आइटम. ऐसी स्वीट डिश, जिसे खाकर वजन बढ़ने की कोई आशंका नहीं है. ऐसी स्वीट डिश, जिसे फ्राई नहीं किया गया है. सिर्फ पांच हजार रुपये किलो, लागरायुक्त सिसेरिस नामक डिश को इंस्टाग्राम पर देखिए, तो इतनी भव्य-दिव्य दिखती है कि इसे खाने का मन ना होता, लगता है कि ड्राइंग रूम की दीवारों पर सजा लें और मेहमानों को इंप्रेस करें- कोई कलाकृति बताकर. हालांकि, भाव भी इस डिश के कलाकृति वाले ही हैं- पांच हजार रुपये किलोवाले.

यह लागरा क्या है? जी लागरा गुड़ को ही कहते हैं लैटिन में. और गुड़ में लिपटे चने को लागरायुक्त सिसेरिस कहते हैं. लागरावाला सिसेरिस- यह किसी योद्धा का सा नाम लगता है. लागरावाला सिसेरिस तो किसी भांगड़ा डांसर का नाम भी हो सकता है. ये नाम बहुत बेवकूफ बनाते हैं. कस्टमर की जेब से महज एक किलो के पांच हजार रुपये निकालने के लिए उसे ठीक-ठाक स्तर का बेवकूफ बनाना पड़ता है.

अब मैं सेलिस का इश्तिहार देख रहा हूं इंटरनेट पर. बहुत ही शानदार सेलिस आपके खाने को स्वादशाली बना सकता है. आपको एनर्जी दे सकता है.

प्रशांत महासागर में खास ढंग की खेती से बनाया गया है- सेलिस सिर्फ बीस हजार रुपये का दस ग्राम. गहन शोध से पता चलता है कि नमक को ही लैटिन भाषा में सेलिस कहते हैं. नाम से लगता है कि कोई फास्ट बाॅलर है- सेलिस. इसके सेवन के बाद फास्ट बाॅलर जैसी एनर्जी आ जायेगी, ऐसी उम्मीद जगाता है सेलिस. पर बीस हजार रुपये का सिर्फ दस ग्राम! इतना महंगा, इतना मूल्यवान सेलिस? अब समझ में आया न कि भाषाएं मूल्यवान क्यों होती हैं, जो सिसेरिस को तीन हजार रुपये किलो बिकवा सकती है!

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