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प्रभात खबर स्थापना दिवस पर विशेष :पाठकों का विश्वास, हमारा सबसे बड़ा संबल

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प्रभात खबर स्थापना दिवस पर विशेष :पाठकों का विश्वास, हमारा सबसे बड़ा संबल
आशुतोष चतुर्वेदी
प्रभात खबर ने आज अपनी यात्रा के 34 वर्ष पूरे कर लिये हैं. 14 अगस्त, 1984 को प्रभात खबर ने एक सुदूर पिछड़े इलाके रांची से अपने सफर की शुरुआत की थी, लेकिन कुछ ही समय में प्रभात खबर ने राष्ट्रीय फलक पर अपनी जगह बना ली.
आज प्रभात खबर 10 स्थानों- रांची, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, पटना,मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, कोलकाता और सिलिगुड़ी से एक साथ प्रकाशित होता है और 2017 के इंडियन रीडरशिप सर्वे के मुताबिक प्रभात खबर के पाठकों की संख्या 1.35 करोड़ है. केवल तीन राज्यों से प्रकाशित होने के बावजूद देश के शीर्ष हिंदी अखबारों में प्रभात खबर छठें स्थान पर है. इस अखबार के आगे बढ़ने का श्रेय सिर्फ और सिर्फ पाठकों को जाता है, जिन्होंने कई विकल्प होने के बावजूद प्रभात खबर के प्रति अपना स्नेह बनाये रखा. अपनी यात्रा के दौरान अखबार ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन निष्पक्ष खबरों को पाठकों तक पहुंचाने की हमारी कोशिश लगातार जारी रही है.
पिछले 34 वर्षों के दौरान राजनीति बदली और अर्थनीति में भी भारी परिवर्तन आया है. अखबार निकालना पहले भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन मौजूदा दौर में और चुनौतीपूर्ण हो गया है. इसके बावजूद प्रभात खबर आज भी पाठकों के साथ खड़ा है. इसमें प्रभात खबर की संपादकीय, मार्केटिंग, सर्कुलेशन, एकाउंट्स एवं फाइनेंस, ब्रांड, प्रोडक्शन और एचआर सभी विभागों के साथियों का योगदान रहा है. उन सभी के योगदान के बिना अखबार अपना यह सफर पूरा नहीं कर पाता.
सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता ही प्रभात खबर की पत्रकारिता की पहचान रही है. हाशिए पर छूट गये लोगों की आकांक्षाओं को प्रभात खबर ने हमेशा स्वर दिया है और अपने सामाजिक दायित्व को बखूबी निभाया है. घपलों-घोटालों को सबसे ज्यादा प्रभात खबर ने ही उजागर किया है. चारा घोटाला उनमें से एक है.
यात्रा के इस अहम पड़ाव में अखबार की महत्वपूर्ण कड़ी- पाठक, विज्ञापनदाता, एजेंट और हॉकरों के प्रति भी मैं हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूं. प्रभात खबर को आप सब की शुभकामनाओं की जरूरत है, ताकि वह अपने दायित्व को बखूबी निभाता रहे.
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