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बढ़ता कौशल विकास

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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तीन साल पूरे हो रहे हैं. इसका लक्ष्य 2022 तक चार करोड़ लोगों को श्रम बाजार के अनुरूप हुनरमंद बनाना है. इसे प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि बेरोजगारी की समस्या का समाधान श्रम शक्ति को कुशल बनाकर किया जा सकता है. तीन वर्षों के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की मदद से चलाये जा रहे 527 कौशल विकास केंद्रों के जरिये ढाई करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है.
कौशल उन्नयन के प्रयासों का श्रम बाजार पर भी अच्छा असर पड़ा है. भारतीय उद्योग परिसंघ की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस साल युवाओं की रोजगार पाने की क्षमता में पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़त हुई है. सूचना प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में यह बढ़ोतरी ज्यादा है और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में संतोषजनक प्रगति हुई है.
लेकिन, यह भी रेखांकित किया है कि इन कोशिशों को लगातार जारी रखने की जरूरत है. भारत युवाओं का देश है. देश की 54 फीसदी आबादी 25 साल या इससे कम उम्र की है और कामकाज की उम्र यानी 15-59 साल के लोगों की तादाद आबादी में 62 फीसदी है. आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, 2025 तक भारत दुनिया में सबसे ज्यादा कार्यबल वाला देश बन चुका होगा और आबादी की औसत आयु 29 साल की हो जायेगी.
लेकिन, उपलब्ध आंकड़े संकेत करते हैं कि रोजगार पाने की उम्र की मात्र 2.3 फीसदी आबादी ही अपने कौशल विकास का प्रशिक्षण हासिल कर सकी है. विकसित देशों की हुनरमंद आबादी से तुलना करने पर स्थिति कहीं ज्यादा चिंताजनक नजर आती है. विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 52 प्रतिशत, ब्रिटेन, जर्मनी तथा जापान जैसे देशों में कार्यबल का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा श्रम बाजार की मांगों के अनुरूप किसी-न-किसी कौशल में दक्ष है.
जर्मनी और जापान में ऐसे कार्यबल की तादाद 70 से 80 फीसदी तक है. सो, युवा भारत में हुनरमंद कार्यबल तैयार करने के लिहाज से कौशल विकास के कार्यक्रम का नियोजित ढंग से विस्तार करना आवश्यक है. कौशल प्रशिक्षण को अधिकार का दर्जा देने से कार्यबल में प्रवेश करनेवाले हर युवा के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य हो जायेगा.
अच्छी बात है कि सरकार ऐसे विधान लाने की सोच रही है. हुनरमंद बढ़ती आबादी के लिए रोजगार के अवसर जुटाने के मोर्चे पर भी गंभीरता से सोचना होगा. हाल में सूचना के अधिकार के तहत दाखिल अर्जी के जवाब से खुलासा हुआ है कि पिछले साल कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण हासिल करनेवाले केवल 30 फीसदी लोगों को ही रोजगार हासिल हो सका था.
ऐसी हालत में ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को साकार करने के लिए और देश के विकास की रफ्तार को कायम रखने के लिए बेहतर कौशल से लैस कार्यबल तैयार करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है.
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