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Home Opinion हम एक खतरनाक मोड़ पर हैं

हम एक खतरनाक मोड़ पर हैं

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हम एक खतरनाक मोड़ पर हैं

II रविभूषण II

वरिष्ठ साहित्यकार

ravibhushan1408@gmail.com

प्राय: प्रत्येक दिन ऐसी कई घटनाएं घट रही हैं, जिन्हें अलग-अलग न देखकर एक साथ देखने से जो निष्कर्ष निकलता है, वह हम सबके लिए कहीं अधिक अशुभ घातक और विध्वंसक है. सत्ता प्राप्ति हेतु देश को बहुत गहरे विभाजित कर दिया गया है- अंग्रेजों से भी कहीं अधिक. राज्य, कानून, नागरिक समाज सब अब सांप्रदायिक भाषा और संकेत समझने लगे हैं. उसे महत्व दे रहे हैं. राजनीतिक और सांस्कृतिक विभेद बढ़ रहा है, अपराध, हिंसा, भय, बलात्कार से हम बहुत कम विचलित-व्यथित हैं. भारत एक नये बर्बर युग में जैसे प्रवेश कर रहा हो.

फिलहाल कठुआ और उन्नाव के बलात्कारियों और उनके समर्थकों को देखें. बलात्कारियों और उनके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2016 में बच्चियों के प्रति बलात्कार की संख्या में 82 प्रतिशत वृद्धि हुई है. अभियुक्तों के समर्थन में जुलूस निकलने लगे हैं. एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा था और दूसरी ओर बलात्कारियों को बचाने के लिए भीड़ भी है. स्त्री सशक्तीकरण की बात मात्र कहने के लिए है. स्त्री, बच्चे, दलित, अादिवासी और अल्पसंख्यक समूहों के प्रति हिंसा और बर्बरता बढ़ रही है.

क्या बलात्कार की घटनाओं से सामान्य नागरिक का कोई संबंध नहीं है? इसकी क्या गारंटी है कि जो कुकृत्य आज दूसरों के साथ हो रहा है, कल वह अन्य के साथ नहीं होगा? अभी न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह कहा है कि आपराधिक मामलों को लेकर जनहित याचिकाएं दायर नहीं की जा सकतीं.

पिछले साल 4 जून, 2017 को उन्नाव की जिस 17 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार हुआ, वह इस अप्रैल महीने में सुर्खियों में आया. भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा, जो चौथी बार विधायक बने हैं और उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक हैं, पीड़ित लड़की ने बलात्कार करने की बात कही. पुलिस ने विधायक के खिलाफ पीड़िता का एफआइआर दर्ज नहीं की.

विधायक के समर्थन में कुछ भाजपा नेता भी आये. पीड़ित परिवार का साहस और संघर्ष एक उदाहरण है, जिससे विधायक को गिरफ्तार किया गया. पीड़ित लड़की के पिता काे पीटा गया, शारीरिक हमला किया गया, गिरफ्तार किया गया और उसकी मृत्यु हिरासत में हो गयी. विधायक घूमता रहा. पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के समक्ष आत्मदाह का प्रयत्न किया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तब भी पहल नहीं की. जम्मू संभाग के कठुआ जिला की 5 तहसीलों में से एक तहसील हीरानगर के एक गांव रसाना के देवस्थान में आठ वर्षीय खानाबदोश जनजाति बखरवाल समुदाय की लड़की से सामूहिक बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गयी.

कठुआ बलात्कार कांड की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने इस घटना की निंदा की है और इसे ‘डरावना’ बताया है. उन्नाव के मारवी गांव में बलात्कार की शिकार लड़की और बलात्कारी विधायक के पुश्तैनी घर हैं. पीड़िता और बलात्कारी दोनों का एक ही गांव है.

रसाना गांव की आठ वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार करनेवाले गांव के ही हैं या उनके तार गांव से जुड़े हैं. गांव के बाबा कालीवीर मंदिर में तीन गांवों के लोग मत्था टेकते हैं. बाबा कालीवीर गांव के देवता हैं. यहां लड़कियों को देवी कहा जाता है, उनकी पूजा की जाती है. मंदिर के संरक्षक सांजीराम की छोटी बेटी की उम्र 27 वर्ष है. राजस्व विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी के साथ चार पुलिसकर्मी, एक सेवानिवृत्त जनसेवक, एक किशोर के नाम चार्जशीट में दर्ज हैं.

आसिफा बानो के पिता मुहम्मद यूसुफ पजवाला ने समय पर बच्ची के गुम होने की सूचना पुलिस को दी थी, पर उसे बेटी की लाश मिली. आसिफा के अपहरण, बलात्कार और हत्या पर जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा की 15 पृष्ठों की चार्जशीट इस बलात्कार पर प्रकाश डालती है. वकीलों ने पुलिस को चार्जशीट दायर करने से रोका. हिंदू एकता मंच ने इस जांच को गलत कहा. इस प्रकरण में जम्मू हाइकोर्ट के बार एसोसिएशन की भूमिका बलात्कारियों के समर्थन में रही. बलात्कारियों के समर्थन में हजारों की भीड़ सड़क पर उतरी.

इस घटना को सांप्रदायिक रंग दिया गया. दायर चार्जशीट में सांजीराम मुख्य षड्यंत्रकारी है. हिंदू एकता मंच का गठन 17 जनवरी, 2018 को आसिफा के शव की खोज के बाद 23 जनवरी को किया गया. एडवोकेट विजय कुमार इसके नेता हैं और सांजीराम हिंदू एकता मंच के संस्थापक सदस्य हैं. आसिफा के बलात्कार और उसकी हत्या के साक्ष्य मिटानेवाले पुलिस ही हैं. बलात्कारियों के समर्थन में ‘भारत बचाओ रथयात्रा’ क्यों है? जो भाजपा मंत्री- चंद्र प्रकाश गंगा और चौधरी लाल सिंह बलात्कारियों के समर्थकों की रैली में शामिल थे, उन्हें भाजपा के राज्य पार्टी अध्यक्ष सत शर्मा ने वहां भेजा था.

उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और जम्मू-कश्मीर में भी भाजपा-पीडीपी की सरकार है. इन बड़ी घटनाओं पर प्रधानमंत्री कई दिनों तक मौन रहे. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को बोलने की सलाह दी है, जो पहले उन्हें लोग देते थे. लोगों को पता चले कि हमारा नेता क्या बोलता है.

बलात्कार की ये दोनों घटनाएं खतरे की घंटियां बजा रही हैं, क्योंकि बलात्कारी विधायक है, उसके समर्थन में जुटी भीड़ में तिरंगा लहराया गया है. क्या हम बर्बर, नृशंस, भयाक्रांत, अनैतिक, अमर्यादित, बलात्कारी देश नहीं बन रहे हैं? क्या हम एक खतरनाक मोड़ पर नहीं आ खड़े हैं?

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