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खिचड़ी का राष्ट्रीय अवतरण

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संतोष उत्सुक
व्यंग्यकार
खिचड़ी अवतरित होने की तिथि ज्यादा पुरानी नहीं हुई है और यह पुराना सच है कि खिचड़ी हमेशा हमारी जिंदगी में थी, है और रहेगी. अब यह ज्यादा माननीय हो गयी है. राष्ट्रीय मंच सजाकर खिचड़ी बना-खिलाकर, विश्व रिकाॅर्ड बनाकर नेक और अनेक काम हो गये.
अखबारों, टीवी, यू-टयूब पर हजारों डिशेज और खाने-पकाने के दर्जनों चैनलों की उपलब्धता के बावजूद पत्नियां परेशान रहती थीं, कि दोपहर में क्या बनाऊं, रात को क्या वही खिलाऊं. मेरी पत्नी तंग आकर जब कहती थी- खिचड़ी बना लूं- तो मुझे लगता था पत्नी गा रही है- ‘हो गया है तुमको बुखार सजना’.
अब लगता है कि जो खिचड़ी विशेष, विश्व खाद्य दिवस पर, ऐतिहासिक इंडिया गेट के प्रांगण में, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाॅर्ड्स की प्रतिनिधि की उपस्थिति में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शैफ संजीव कपूर के नेतृत्व में पचास शेफों के हाथों से बने, बाबा रामदेव छौंक लगाएं, जिसे केंद्रीय मंत्री भी हिलाएं, और विश्व से पधारे पांच दर्जन से अधिक कंपनी प्रमुखों की प्लेट में सजाया जाये, तो लगता है कि देश की खाद्य समस्या का हल मिल गया है.
ऐसा भी बताते हैं कि विशेष खिचड़ी को पूजा स्थलों में भी अर्पित किया गया और खास बात यह कि ऐसे आम लोगों को भी चखने का मौका दिया गया, जिन्हें ऐसी खिचड़ी तो क्या वैसी खिचड़ी भी आराम से नसीब नहीं होती. भारतवर्ष, भारत, हिंदुस्तान, इंडिया और अब न्यू इंडिया में एक नहीं, जाने कितनी ही किस्म की खिचड़ियां उपलब्ध रही हैं, जो हमें बेहद स्वादिष्ट लगती हैं, आराम से पचती हैं. जैसे- राजनीतिक खिचड़ी, धार्मिक खिचड़ी, जातीय खिचड़ी व सांप्रदायिक खिचड़ी आदि. हमारे देशप्रेमी नेता, योजनाप्रेमी सरकारी अफसर व सहयोगी कर्मठ ठेकेदारों की तिकड़ी की खिचड़ी लोकतंत्र का सुपर प्रोडक्ट है.
रुकिये, आपका स्वाद बदलते हैं. अब जो खिचड़ी पकायी गयी है, इससे देश के बाजार में प्रतियोगिता बढ़नेवाली है. कुछ दिन बाद सिल्वर, गोल्डन व डायमंड खिचड़ी आयेगी. डिजाइनर खिचड़ी मार्केट में उतरेगी, जिसके कई वर्जन होंगे. तरल, थोड़ी सख्त, ज्यादा सख्त, जिसे आप मूड व बीमारी के अनुसार ले सकेंगे. कई रंगों में उपलब्ध होगी जैसे पीली, हरी, लाल. अनुसंधान के बाद नये स्वादों में बेची जायेगी.
हो सकता है बड़े खिलाड़ी खिचड़ी के स्वास्थ्यवर्धक बिस्कुट, गोलियां, पेय व चाॅकलेट की तरह खिचलेट भी बाजार में ले आयें. चैनल वाले देश की समस्याओं पर बात न कर खिचड़ी पर वार्ताएं आयोजित करेंगे.
विज्ञापनों की दुनिया में खिचड़ी छा जायेगी. पैक्ड खिचड़ी मिलेगी, जिस पर लिखा होगा- मशहूर शैफ संजीव कपूर द्वारा डिजाइंड और बाबा रामदेव के करकमलों द्वारा छौंकी गयी खिचड़ी. यह खिचड़ी नाश्ते में, दोपहर में और रात में भी नियमित खायी जाये, तो गरीबी फेल हो सकती है और सेहत पास. पर एक सवाल है- क्या खिचड़ी नॉन वेज भी हो सकती है?
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