-पुष्यमित्र-
मैं इस बात से आज की तारीख में पूरी तरह मुतमइन हूं कि पेट्रोल की कीमत को बढ़ा कर सौ रुपये लीटर कर देना चाहिए, मगर उससे पहले उस युवक को सस्ता और सुलभ परिवहन उपलब्ध कराना चाहिए जो रोज अपने फटफटिया पर दो क्विंटल दूध लाद कर शहर लाता है और रोजगार करता है. उस महिला शिक्षिका के लिए यातायात की सुविधा होनी चाहिए जो रोज पूर्णिया से चालीस किमी दूर जाकर स्कूल में बच्चों को पढाती हैं. उस सेल्समैन के लिए सुलभ परिवहन व्यवस्था चाहिए जो रोज अपनी बाइक पर सामान लाद कर दुकान-दुकान पहुंचाता है. यह सिर्फ कार चलाने वालों की बात नहीं है मंत्री जी. इस देश की बड़ी आबादी आज मोपड, स्कूटी, बाइक पर इसलिए चलती है, ताकि वह समय से अपने दफ्तर पहुंच सके. फील्ड जॉब कर सके. व्यापार कर सके. सौ रुपए या डेढ़ सौ रुपये लीटर पेट्रोल निश्चित रूप से उसके बजट पर असर डालेगा.
