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यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन का सच क्या है?

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यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन का सच क्या है?
यूथ कांग्रेस शर्टलेस प्रोटेस्ट

Youth Congress Shirtless Protest : एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के सदस्यों ने दिल्ली के भारत मंडपम में शर्टलेस प्रदर्शन किया और सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया. एआई समिट में देश–विदेश के कई प्रतिष्ठित लोग मौजूद थे, इसलिए कांग्रेस के इस प्रदर्शन के टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं. इस विरोध को महज तात्कालिक विरोध के रूप में नहीं लिया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि इस विरोध का उद्देश्य दूरगामी है. यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने–सामने है. आरोप यह भी है कि युवाओं को भड़काने की कोशिश हो रही है और जिस तरह का प्रदर्शन नेपाल में हुआ उसी तर्ज पर भारत के युवाओं को उकसाया जा रहा है.


यूथ कांग्रेस ने भारत मंडपम में क्यों किया प्रदर्शन?

कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करके उसपर दबाव बनाना चाह रही है, क्योंकि एआई समिट में विदेश के भी कई दिग्गज मौजूद थे. इस प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को लेकर भी बहस हो रही है. यूथ कांग्रेस का कहना है कि वे भारत–अमेरिका समझौते के खिलाफ अपना प्रदर्शन कर रहे थे, क्योंकि इस समझौते की वजह से देश के प्रतिभावान युवाओं का नुकसान होगा. सरकार ने इस समझौते में युवाओं के हितों से समझौता कर लिया है. यूथ कांग्रेस ने कहा कि हमने पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था, बेवजह हमारे प्रदर्शन को बदनाम किया जा रहा है यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है. हम सरकार को उनकी जिम्मेदारियों की याद दिला रहे हैं, जिससे वह भागने की कोशिश कर रही है.

आखिर शर्टलेस प्रदर्शन के जरिए यूथ कांग्रेस साबित क्या करना चाहती थी?

शर्टलेस प्रदर्शन के जरिए यूथ कांग्रेस यह बताना चाहती है कि वह सरकार के फैसले से कितनी नाराज है. इस तरह का प्रदर्शन विरोध की उग्रता को बताने का प्रयास है, जहां प्रदर्शनकारी अपनी प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगाकर बिना शर्ट के प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके साथ ही मीडिया और लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए भी यूथ कांग्रेस के लोगों ने शर्टलेस प्रदर्शन किया.


क्या देश को बदनाम करने की साजिश कर रहे थी यूथ कांग्रेस?

यूथ कांग्रेस के नेताओं को हिरासत में लेने और अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस ने यह दावा किया कि यूथ कांग्रेस के लोग अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को बदनाम करने की साजिश कर रहे थे. इसी साजिश के तहत उन्होंने देश विरोधी नारे भी लगाए. हालांकि यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन शांतिपूर्ण ही था. एआई समिट के दौरान जो कुछ हुआ, उसने एक बहस को जन्म दे दिया है कि क्या एक ऐसे समिट में जहां कई देशों के प्रतिनिधि शामिल थे, यूथ कांग्रेस को इस तरह का प्रदर्शन करना चाहिए था?

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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