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World Population Day: बढ़ती जनसंख्या भारत के लिए खतरे की घंटी, ये हैं सबसे बड़ी चुनौतियां

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World Population Day: बढ़ती जनसंख्या भारत के लिए खतरे की घंटी, ये हैं सबसे बड़ी चुनौतियां

दुनियाभर में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को सबसे पहले 1989 में मनाया गया. संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organisation) ने 11 जुलाई को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे के रूप में मनाने की घोषणा की. तब से हर साल इस दिन को सेलिब्रेट किया जाने लगा है. इस दिन को मनाने के पीछे एक ही उद्देश्य है कि लोगों को बढ़ती जनसंख्या और उसके दुष्प्रभाव से अवगत कराया जाए. आपको शायद यह जानकारी हो चुकी होगी कि भारत ने जनसंख्या के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है और दुनिया का सबसे बड़ा पॉपुलेशन वाला देश बन गया है. यह खुश होने और गर्व करने जैसी बात नहीं है, बल्कि हम सबके लिए चिंतन करने वाली बात है. भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए हमें अभी से तैयार रहना होगा.

भारत की जनसंख्या 1428.6 मिलियन

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की जनसंख्या 1428.6 मिलियन हो चुकी है. जबकि चीन की जनसंख्या 1425.7 मिलियन है. यानी भारत की जनसंख्या चीन से 2.9 मिलियन ज्यादा हो गयी है. ये आंकड़े हमें डराने के लिए काफी हैं. कई चुनौतियां भारत के सामने मुंह खोलकर खड़ी हो गयीं हैं.

बढ़ती जनसंख्या और भारत की चुनौतियां

जिस तरह से भारत में जनसंख्या बढ़ती जा रही है, यह हमसब के लिए चिंता की बात है. जनसंख्या विस्फोट देश के सामने कई चुनौतियां लेकर आया है. जनसंख्या बढ़ने से संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा. भोजन, पानी, आवास, ऊर्जा, स्वास्थ्य की समस्या बढ़ेंगी.

संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव

बढ़ती जनसंख्या की वजह से सबसे अधिक असर संसाधनों पर पड़ेगा. प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा. जल, जंगल, जमीन और खनिज का जरूरत से ज्यादा दोहन बढ़ जाएगा. जिससे भविष्य में इन संसाधनों का घोर अकाल पड़ जाएगा. हमारी आने वाली पीढ़ियों के सामने गंभीर चुनौती उत्पन्न हो जाएगी. उनके लिए जीवन आसान नहीं रह जाएगा.

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जैव विविधता में कमी

जनसंख्या में वृद्धि अनिवार्य रूप से दबाव पैदा करेगी. लोगों के पास रहने के लिए जमीन की कमी होने लगेगी. जिससे लोग जंगलों की ओर भागेंगे. वनों की कटाई से जैव विविधता में कमी आएगी. जिससे प्रदूषण और उत्सर्जन में वृद्धि होगी, जो जलवायु परिवर्तन को बढ़ा देगा. रहने के लिए जमीन और खाने के लिए भोजन नहीं मिलने से झगड़े बढ़ेंगे. हिंसा और राजनीतिक अशांति बढ़ेगी.

आपदाओं और महामारियों का खतरा

देश-दुनिया ने कोरोना जैसी महामारी को करीब से देख लिया है. किस तरह से इस वैश्विक महामारी ने दुनिया को तबाह करके छोड़ दिया. कोरोना संकेत है, हमारे लिए. अगर हम इस संकेत को नहीं समझे और जनसंख्या में लगातार वृद्धि होती गयी, तो आने वाले दिनों में ऐसी कई महामारियों का सामना करने के लिए हमें तैयार रहना होगा. जनसंख्या बढ़ने से पर्यावरण साफ और शुद्ध नहीं रहेगा. गंदगी का अंबार होगा, पीने के लिए साफ पानी नहीं मिलेगी. जिससे रोग बढ़ते जाएंगे. जिससे स्वास्थ्य की चिंताएं बढ़ जाएंगी.

बेरोजगारी और भूखमरी की समस्या

जनसंख्या बढ़ने से सबसे समस्या रोजगार को लेकर आती है. एक बड़ी आबादी को रोजगार देना आसान नहीं है. आज के समय में भारत में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभरकर सामने आयी है. लगातार बढ़ती जनसंख्या की वजह से समस्या भविष्य में और विकराल रूप धारण कर लेगी. रोजगार की कमी होने से लोगों में भूखमरी बढ़ेगी. आर्थिक असमानता बढ़ने से लोगों में अशांति फैलेगी.

बड़ी आबादी को शिक्षित करना बड़ी चुनौती

भारत में जिस तरह से जनसंख्या में बढ़ोतरी हो रही है, आने वाले दिनों में शिक्षा और कौशल विकास सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी. जिनती संख्या में लोगों को शिक्षित करना और उन्हें कुशल बनाने की जरूरत होगी, शायद उतनी क्षमता शैक्षणिक संस्थानों के पास नहीं होंगी. इसका परिणाम होगा कि एक बड़ी आबादी को सही शिक्षा नहीं मिल पाएगी. लोगों में अशिक्षा बढ़ेगी.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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