Water: देश में नदियों को जोड़ने के लिए 30 परियोजना हुई है तैयार
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के तहत चिन्हित नदियों को आपस में जोड़ने वाली 30 परियोजनाओं में से 26 लिंक की व्यवहार्यता रिपोर्ट (एफआर) और 13 लिंक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी हो चुकी है. देश में पिछले पांच साल में नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं में गोदावरी-कृष्णा नदी लिंक, कृष्णा (अलमट्टी)-पेन्नार लिंक, बेदती-वरदा लिंक, नेत्रावती-हेमावती लिंक और केन-बेतवा लिंक, कोसी-मेची नदी लिंक जैसी कई योजना को मंजूरी मिल चुकी है.
Water: देश में कृषि और पेयजल के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बनती जा रही है. इस चुनौती का सामना करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से काफी समय पहले नदियों को जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना बनाने का काम शुरू किया गया. लेकिन विभिन्न कारणों से इस योजना पर काम आगे नहीं बढ़ पाया. वर्ष 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद नदियों को आपस में जोड़ने की योजना को गति मिली. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के तहत चिन्हित नदियों को आपस में जोड़ने वाली 30 परियोजनाओं में से 26 लिंक की व्यवहार्यता रिपोर्ट (एफआर) और 13 लिंक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी हो चुकी है.
देश में पिछले पांच साल में नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं में गोदावरी-कृष्णा नदी लिंक, कृष्णा (अलमट्टी)-पेन्नार लिंक, बेदती-वरदा लिंक, नेत्रावती-हेमावती लिंक और केन-बेतवा लिंक, कोसी-मेची नदी लिंक जैसी कई योजना को मंजूरी मिल चुकी है. मौजूदा समय में केन-बेतवा लिंक परियोजना एकमात्र प्राथमिकता वाली परियोजना है जिसपर काम शुरू हो चुका है और इस योजना पर लगभग 44605 करोड़ रुपये खर्च होना है. कुल खर्च में से 39317 करोड़ रुपये केंद्र सरकार मुहैया कराएगी.
दशकों से लंबित उत्तर कोयल जलाशय परियोजना एक प्रमुख अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना है. इस योजना के पूरा होने से बिहार और झारखंड को लाभ मिलेगा. इस परियोजना की स्वीकृत लागत 2,430.76 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 1836.41 करोड़ रुपये है और इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस परियोजना के पूरा होने से 114021 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी.
पर्यावरणीय पहलुओं को मिल रही है प्राथमिकता
नदियों को आपस में जोड़ने वाली सभी परियोजना के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट (एफआर) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करते समय पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) किया जाता है, ताकि नदी तटवर्ती समुदायों सहित सभी समुदायों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का आकलन किया जा सके. साथ ही पर्यावरण और वन्यजीव संबंधी मंजूरी हासिल करना अनिवार्य है. गौर करने वाली बात है कि सहभागी राज्यों द्वारा क्रियान्वयन समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद केंद्रीय सहायता के मूल्यांकन और विचार के लिए प्रस्ताव पेश किए जाते है. केंद्र और राज्यों के बीच लागत साझाकरण व्यवस्था एक समान नहीं है.
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल के अनुसार पिछले पांच साल में केन-बेतवा लिंक परियोजना को मंजूरी मिली है. इस योजना से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के किसानों को फायदा होगा और योजना पूरा होने पर 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी. साथ ही कोसी-घाघरा नदी को जोड़ने का एफआर तैयार हो चुका है. इस योजना से बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के किसानों को फायदा होगा और लगभग 8.35 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी. चुनार-सोन बैराज और फरक्का-दामोदर नदी को जोड़ने से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के किसानों को फायदा होगा.
