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VICE PRESIDENT: अपने बच्चों पर दबाव न डाले अभिभावक

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VICE PRESIDENT: अपने बच्चों पर दबाव न डाले अभिभावक

VICE PRESIDENT: “संकीर्ण लक्ष्य निर्धारित न करें. आत्म-केंद्रित लक्ष्य न रखें. समाज के लिए, मानवता के लिए, राष्ट्र के लिए एक लक्ष्य निर्धारित करें. अगर आप लगभग एक हजार वर्ष पहले की घटनाओं पर विचार करें, तो सोचें हम आज किसे याद कर रहे हैं? केवल उन्हें, जिन्होंने समाज को कुछ दिया, जिन्होंने समाज के लिए काम किया, जो समाज के लिए जिये और जिन्होंने समाज के लिए अपना जीवन उत्सर्ग किया.

” शेरवुड महाविद्यालय के 156 वें स्थापना दिवस समारोह में छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने यह बात कही. धनखड़ ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा, “अभिभावकता-समस्त मानवता के लिए सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है. इसलिए कृपया अपने बच्चों पर दबाव न डालें. यह तय न करें कि उनके जीवन का उद्देश्य क्या है. अगर वे सभी धन की खोज में, सत्ता की तलाश में लग जाएंगे, तो हमारे वैज्ञानिक कैसे पैदा होंगे? हमारे पास खगोलशास्त्री कहां होंगे? हमारे पास ऐसे लोग कहां होंगे जो पूरे विश्व के लिए नियति निर्धारित करते हैं?”

आदर्श वाक्य दीवारों पर टांगने के लिए नहीं होते


आदर्श वाक्य के महत्व को बताते हुए धनखड़ ने कहा, “आदर्श वाक्य दीवारों पर टांगने के लिए नहीं होते. इसे जीवन का हिस्सा बनना चाहिए. ऐसा होने पर आदर्श वाक्य देखें. सिर्फ दूसरे से प्रतिद्वंद्विता न करें. दूसरे ने जो किया है, उससे ईर्ष्या न करें. आपको अपने लिए उच्च स्तर प्राप्त करते रहना चाहिए. इस प्रक्रिया में जितना अधिक आप किसी का हाथ थामेंगे, जितना ज़्यादा आप किसी की मदद करेंगे, यहां तक कि अपने से आगे बढ़ेंगे, वह आपका योगदान होगा. ऐसे कई लोग हैं जो खेल, विज्ञान, राजनीति और अन्य क्षेत्रों में बहुत महान बन गए हैं, लेकिन वे किसी और को श्रेय देंगे जो शायद उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया हो.”

सिर्फ साक्षर करना नहीं, बल्कि उन्हें सक्षम करना है लक्ष्य 


हाल की यात्रा और विकसित भारत के लक्ष्य की चर्चा करते हुए,  धनखड़ ने कहा, “इस सदी में हमारा लक्ष्य लोगों को केवल साक्षर करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सक्षम करना भी है. भारत में साक्षरता का बहुत पहले से महत्व था. भारत आज केवल संभावनाओं वाला राष्ट्र नहीं रहा. इस राष्ट्र की क्षमता का दिन-प्रतिदिन उपयोग किया जा रहा है. यह एक उभरता हुआ राष्ट्र है. इसकी उन्नति निरंतर है”. यह उन्नति क्रमिक है.पिछले दशक की बात करूं, तो वैश्विक मानकों पर  भारत का आर्थिक उत्थान तेजी से हुआ है. देश के बुनियादी ढांचे का विकास अभूतपूर्व रहा है. बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में हम सबसे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. भारत के लिए पिछला दशक विकास का दशक रहा है, वैश्विक व्यवस्था में एक नया स्थान पाने का दशक रहा है.आप सभी को इसे अभी और आगे ले जाना है – क्योंकि एक विकसित राष्ट्र का दर्जा ही हमारा गंतव्य है.

उपराष्ट्रपति ने कहा, “भारत में आज सबसे अधिक स्मार्टफोन, डिजिटल पैठ और कनेक्टिविटी है, जो विश्व में अद्वितीय है. आप सबने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स, ब्लॉकचेन, मशीन लर्निंग और इस तरह की अन्य चीज़ें. यह सब आपके जीवन, स्कूल, कार्यस्थल और घरों में शामिल हो चुके हैं. लेकिन आपको बदलना होगा और खुद को ढालना होगा जिससे कि आप एक ऐसे देश, भारत के योग्य नागरिक बन सकें, जहां विश्व की आबादी का छठा हिस्सा निवास करता है”

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