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Home National तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने जीता फ्लोर टेस्ट, 144 वोट पक्ष में पड़े

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने जीता फ्लोर टेस्ट, 144 वोट पक्ष में पड़े

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने जीता फ्लोर टेस्ट, 144 वोट पक्ष में पड़े
तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान विजय

Tamil Nadu floor test updates: तमिलनाडु में विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्त्री कजगम) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में तो उभरी, लेकिन बहुमत से 10 अंक पीछे रह गई. विजय ने कई छोटी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाई और बुधवार को फ्लोर टेस्ट का सामना किया. उनके पक्ष में 144 वोट पड़े, एआईएडीएमके में फूट की वजह से उन्हें इतने सांसदों का समर्थन मिला है. सभी पार्टियों के कई विधायकों ने विश्वास मत में हिस्सा लिया. विजय ने रविवार, 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

सीएम विजय ने हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोपों को खारिज किया

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्यमंत्री विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिस पर सभी दलों के विधायकों ने चर्चा में भाग लिया. विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने मतों के विभाजन के बाद परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 144 विधायकों ने मतदान किया, जबकि 22 विधायकों ने इसका विरोध किया. पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित पांच विधायक तटस्थ रहे. मुख्य विपक्षी दल द्रविड मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) ने मतदान से पहले ही सदन से बहिर्गमन किया.अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) से निष्कासित विधायक एस कामराज ने भी सरकार के पक्ष में मतदान किया.विश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने विपक्ष द्वारा लगाए गए विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) के आरोपों को खारिज कर दिया.

कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ने समर्थन की घोषणा की

विश्वास मत में भाग लेते हुए माकपा ने टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है. कांग्रेस ने भी टीवीके की सरकार को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी है. वहीं पीएमके  (पट्टाली मक्कल काची) नेता सौम्या अंबुमणि ने कहा कि उनकी पार्टी तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत पर मतदान से परहेज करेगी.

AIADMK के एक गुट ने किया समर्थन ना देने का फैसला

हालांकि, विजय का फ्लोर टेस्ट AIADMK के अंदरूनी उठापटक को बढ़ाने का स्टेज भी बना, क्योंकि पार्टी के एक गुट ने विजय को सपोर्ट करने का फैसला किया और उनके पक्ष में मतदान किया. वहीं विधानसभा में AIADMK के विधायक एडप्पादी के पलानीस्वामी ने कहा कि हम टीवीके सरकार के खिलाफ वोट करेंगे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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