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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- निर्वाचन आयोग को SIR कराने का अधिकार है

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- निर्वाचन आयोग को SIR कराने का अधिकार है
सुप्रीम कोर्ट. फोटो एक्स

Supreme Court On SIR: बिहार में एसआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, कोई प्रक्रिया शुरुआत में भले ही भेदभावपूर्ण प्रतीत हो, लेकिन उचित सुरक्षा उपायों के जरिए उसे संवैधानिक रूप से अनुरूप बनाया जा सकता है. हम संतुष्ट हैं कि विवादित एसआईआर प्रक्रिया अनुपातिकता की कसौटी पर खरी उतरती है. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे. पीठ ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता कि निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया अपनाकर अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर काम किया. हम इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते कि विवादित प्रक्रिया केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनाई गई थी. इसके विपरीत, हम मानते हैं कि चुनावी एसआईआर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक आवश्यकता को बल देता है.

निर्वाचन आयोग को SIR करने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग को संवैधानिक प्रावधानों और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने का अधिकार है.
उसने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव मतदाता सूचियों की शुचिता, सटीकता और विश्वसनीयता पर निर्भर करते हैं. कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं होते.

याचिका में क्या कहा गया था?

याचिकाओं में दावा किया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उससे संबंधित नियमों के तहत निर्वाचन आयोग को इतने व्यापक स्तर पर एसआईआर कराने का अधिकार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था. इन याचिकाओं में गैर-सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) की याचिका भी शामिल थी. बिहार में एसआईआर अभियान का पहला चरण चलाया गया था. पिछले वर्ष 12 अगस्त को कोर्ट ने मामले में अंतिम बहस शुरू की थी और तब कहा था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करना या हटाना निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है.

चुनाव आयोग ने 65 लाख लोगों के नाम वोटिंग लिस्ट से हटाए थे

निर्वाचन आयोग ने एसआईआर अभियान के तहत प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख लोगों के नाम सार्वजनिक किए थे. एसआईआर अधिसूचना के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, उन्हें उस समय सूची में शामिल किसी व्यक्ति से अपना पैतृक संबंध साबित करना था. एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा था कि आधार और मतदाता पहचान पत्र को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसी प्रक्रिया है, जिसमें निर्वाचन आयोग नागरिकता की जांच कर रहा है, जबकि यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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