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Home National सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी जमानत, रिनिकी भुइयां सरमा के आरोपों पर जांच जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी जमानत, रिनिकी भुइयां सरमा के आरोपों पर जांच जारी रहेगी

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सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी जमानत, रिनिकी भुइयां सरमा के आरोपों पर जांच जारी रहेगी
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा

Pawan Khera : पवन खेड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बाबा साहेब का संविधान किसी भी आम नागरिक की रक्षा के लिए तब आता है जब कोई भी सरकार उसके अधिकारों का उल्लंघन करती है. उन्होंने कहा कि जब भी हम लड़ाई के मैदान से जाते हैं, तो हम छिपते नहीं हैं बल्कि अगली लड़ाई की तैयारी करते हैं.

पवन खेड़ा को किस मामले में मिली बेल?

पवन खेड़ा का मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ा हुआ है, लेकिन बाद में यह मानहानि और फर्जी जानकारी फैलाने के केस में बदल गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पवन खेड़ा को राहत दी है,लेकिन उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी. पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर यह आरोप लगाया था कि उनके पास कई देशों के पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति हैं.इस आरोपों के बाद विवाद शुरू हुआ और पवन खेड़ा पर एफआईआर दर्ज कराया गया, जिसमें मानहानि और फर्जी जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया. इसी केस में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी, जिसमें उन्हें राहत मिल गई.

विधानसभा चुनावों में निर्णायक जनादेश आएगा

पवन खेड़ा ने मीडया से बात करते हुए कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि ज़ुल्मी सरकारों के खिलाफ एक निर्णायक जनादेश आ रहा है.वे भूल जाते हैं कि 2008-2009 में आडवाणी जी ने चुनाव आयोग के बारे में क्या कहा था. वे खुद भूल जाते हैं कि उन्होंने चुनाव आयोग से क्या सवाल पूछे थे और हमने उनका जवाब दिया.उस समय का चुनाव आयोग और आज का चुनाव आयोग, उस समय की सरकार और आज की सरकार, कोई तुलना मुमकिन नहीं है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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