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Steel Sector: ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए तीन पायलट प्रोजेक्ट होंगे शुरू

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Steel Sector: ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए तीन पायलट प्रोजेक्ट होंगे शुरू

Steel Sector: कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए सरकार नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा दे रही है. नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत केंद्र सरकार ने स्टील उत्पादन के क्षेत्र में तीन पायलट प्रोजेक्ट योजना को मंजूरी दी है.  इससे पहले नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत स्टील क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी किया था. पायलट प्रोजेक्ट का मकसद स्टील निर्माण में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना और बेहतर तकनीक का उपयोग करना है.

सरकार की कोशिश कम कार्बन उत्पादन वाले लौह और स्टील का उत्पादन करना है. इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट में वर्टिकल शाफ्ट का प्रयोग कर 100 फीसदी ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने,  कोयले की खपत को कम करने के लिए ब्लास्ट फर्नेस में हाइड्रोजन का उपयोग और वर्टिकल शाफ्ट आधारित डीआरआई बनाने वाली इकाई में हाइड्रोजन का प्रयोग को बढ़ावा देने पर काम किया जायेगा. इसके लिए मंत्रालय ने मैट्रिक्स गैस एंड रिन्यूएबल्स लिमिटेड (कंसोर्टियम के सदस्य हैं जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर, मेटसोल एबी, स्वीडन) जिसकी पायलट प्लांट क्षमता 50 टन प्रति दिन (टीपीडी), सिम्प्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड (कंसोर्टियम के सदस्य हैं बीएसबीके प्राइवेट लिमिटेड, टेन एट इन्वेस्टमेंट, आईआईटी भिलाई) जिसकी पायलट प्लांट क्षमता 40 टीपीडी है और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (रांची) जिसकी प्लांट क्षमता 3200 टीपीडी को मंजूरी दी है. 


क्या है ग्रीन हाइड्रोजन मिशन


इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार की ओर से 347 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी और अगले तीन साल में पायलट प्रोजेक्ट काम करना शुरू कर देगा. इसका मकसद देश में ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में नयी तकनीक के विकास को बढ़ावा देना है. नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को वित्त वर्ष 2029-30 तक 19,744 करोड़ रुपये के आवंटन के 4 जनवरी 2023 को शुरू किया गया है. इसका मकसद स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और इस मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाना है. सरकार की कोशिश पेट्रो उत्पाद के आयात पर निर्भरता कम करना और देश को वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है. 

गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. ऐसे में वैश्विक स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा को अधिक तरजीह दी जा रही है ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक देश में 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे. साथ ही इससे सालाना देश में 50 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा और प्रदूषण के स्तर में कमी आने के साथ ही सरकार के ऊर्जा पर होने वाले खर्च में कमी आयेगी.

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