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Home National Shibu Soren Death: जब संसद में गरजे थे शिबू सोरेन, झारखंड को वनांचल कहने पर हुए थे सख्त नाराज, देखें वीडियो

Shibu Soren Death: जब संसद में गरजे थे शिबू सोरेन, झारखंड को वनांचल कहने पर हुए थे सख्त नाराज, देखें वीडियो

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Shibu Soren Death: जब संसद में गरजे थे शिबू सोरेन, झारखंड को वनांचल कहने पर हुए थे सख्त नाराज, देखें वीडियो
shibu soren file photo

Shibu Soren Death: दिशोम गुरु बाबा शिबू सोरेन ने 28 मई 1996 को लोकसभा में जोरदार भाषण दिया था. उन्होंने संसद में झारखंड अलग राज्य की मांग रखी थी. लेकिन उस समय उन्होंने झारखंड और आदिवासी अस्मिता की बात करते हुए झारखंड को वनांचल कहने पर आग बबूला हो गए थे.

झारखंड को वनांचल कहने पर भड़के थे शिबू सोरेन

विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए शिबू सोरेन ने कहा था, “प्रधानमंत्री बराबर सांस्कृतिक धरोहर की बात करते हैं. और इसी आधार पर बंबई जो अंग्रेजी नाम था, उसे मुंबई किया. झारखंड जो हमारा पौराणिक नाम है, जिसमें हमारी श्रद्धा और संस्कृति रही है, जंगल-झाड़ का, उसको ये लोग वनांचल बोलते हैं. उत्तराखंड जिसे हमलोग बोलते थे, उसे उत्तरांचल बोल दिया. इसके क्या मायने हैं. अगर आदमी का परिचय, आदमी का इतिहास समाप्त हो जाएगा, तो क्या मिलेगा. हमें कौन सा राज्य चाहिए, कौन सा अलग राज्य चाहिए. आदिवासियों की अलग परंपरा है, आदिवासी जंगलों में रहते हैं. उनकी अपनी-अपनी जाति और नाम है. उनका अपना सरनेम होता है. जो टोप्पो, कश्यप और उरांव हैं, उनको ये लोग बोलते हैं अपने नाम के अंत में राम लिखो. तो इसका क्या असर होगा, क्या अंजाम होगा. तो क्या डर के मारे हमलोग अपने नाम के अंत में राम लिखे. दुखी समाज को भी दुख देने का अगर नियम बने तो क्या हो सकता है.”

आदिवासियों की अनदेखी पर भी नाराज हुए थे शिबू सोरेन

लोकसभा में अपने भाषण में शिबू सोरेन ने आदिवासियों की अनदेखी का भी मुद्दा उठाया था. उन्होंने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा था, केंद्र में जो भी सरकार बनती है, वो आदिवासियों की अनदेखी करती है. आदिवासियों के विकास की बात नहीं की जाती, बल्कि उनका नाश ही होता है. जबकि देश के कई इलाकों, जंगलों में आदिवासी रहते हैं.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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