राम मंदिर दान विवाद: अरविंद केजरीवाल का दावा, निष्पक्ष जांच हुई तो गिर जाएगी योगी सरकार
Ram Temple Donation Row: अयोध्या में राम मंदिर के दान और वित्तीय प्रबंधन में हेराफेरी मामले की जांच एसआईटी कर रही है. इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने योगी सरकार को लेकर बड़ा दावा कर दिया है.
Ram Temple Donation Row: अरविंद केजरीवाल का दावा है कि राम मंदिर चंदे के विवाद पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है; उनका कहना है कि अगर जांच आगे बढ़ी तो सरकार गिर सकती है.
अयोध्या में राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा चोरी हो गया : केजरीवाल
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर अपना एक वीडियो संदेश जारी किया. जिसमें उन्होंने कहा- अयोध्या में राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा चोरी हो गया है. खबर है कि लगभग 200 करोड़ रुपये नकद, हीरे और गहनों से भरे कई बक्से चोरी हुए हैं, और एक भी FIR दर्ज नहीं की गई है. न तो UP पुलिस ने FIR दर्ज की, न ही ED ने और न ही CBI ने.
ट्रस्ट के पदाधिकारियों, मंदिर से जुड़े अन्य लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का निर्देश
जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए. ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं. रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा. एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है.
भगवान राम को चढ़ाए गए आभूषणों, कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई
प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है. सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारी सोने, चांदी और अन्य आभूषणों तथा कीमती पत्थरों से संबंधित रिकॉर्ड पर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.
सबसे बड़ी अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई
पीटीआई के अनुसार सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं. एसआईटी की जांच केवल धन के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच में ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है. ट्रस्ट ने बाजार भाव से लगभग 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर करीब 71 एकड़ जमीन खरीदी है.
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