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Home National Rain Warning: मानसून ने पकड़ी रफ्तार, उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर में एंट्री, जानें बिहार-झारखंड में कब होगी बारिश?

Rain Warning: मानसून ने पकड़ी रफ्तार, उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर में एंट्री, जानें बिहार-झारखंड में कब होगी बारिश?

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Rain Warning: मानसून ने पकड़ी रफ्तार, उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर में एंट्री, जानें बिहार-झारखंड में कब होगी बारिश?
दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तरी बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचा, फोटो- पीटीआई

Rain Warning: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार (9 जून) बताया को जारी बुलेटिन में बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर राज्यों के शेष भागों, पूरे सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों तक पहुंच गया है. उत्तरी बंगाल को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का प्रवेश द्वार माना जाता है, ऐसे में मानसून का यहां पहुंचना क्षेत्र में अच्छी बारिश की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है. आईएमडी ने उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार जिलों में 13 जून तक भारी बारिश का पूर्वानुमान जाहिर किया है. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने को कहा है.

दक्षिण बंगाल में भी बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 15 जून तक दक्षिण बंगाल के कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. फिलहाल इस क्षेत्र में उमस भरा मौसम बना हुआ है. वहीं मानसून की बारिश से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक क्षेत्र में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन और तेज दक्षिण-पश्चिमी हवाओं ने मानसून को आगे बढ़ने में मदद की है. इन्हीं अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है और अगले चार से पांच दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकता है.

अगले चार-पांच दिनों में बिहार-झारखंड समेत इन राज्यों में हो सकती है दस्तक

मौसम विभाग ने कहा कि अगले चार से पांच दिनों में मानसून के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. ऐसे में बिहार-झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी मानसून की दस्तक हो सकती है.

केरल में 4 जून को हुई थी मानसून की एंट्री

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस साल 4 जून को केरल में दस्तक दी थी. इसके साथ ही देश में चार महीने तक चलने वाले वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत हो गई थी. इसके बाद मानसून लगातार उत्तर और पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है. आईएमडी का अनुमान है कि इस साल देश में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के करीब 90 प्रतिशत के आसपास रह सकती है. दीर्घकालिक औसत (Long Period Average) किसी क्षेत्र में 30 से 50 साल के दौरान दर्ज की गई औसत बारिश को कहा जाता है. साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर भारत की मौसमी बारिश का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है. यदि मानसून के दौरान बारिश एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो इसे कम वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है.

अल नीनो का दिख सकता है असर

मौसम विभाग ने बताया कि सामान्य से कम बारिश की संभावनाओं के पीछे अल नीनो की स्थिति एक प्रमुख कारण हो सकती है. आईएमडी के अनुसार जून के दौरान अल नीनो का प्रभाव कमजोर रहने की संभावना है, लेकिन सितंबर तक इसके मध्यम से मजबूत होने के संकेत हैं. अल नीनो के प्रभाव से आमतौर पर भारत में मानसून के दौरान बारिश में कमी देखी जाती है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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