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Railway: रेलवे नेटवर्क का 97 फीसदी ट्रैक का हो चुका है बिजलीकरण

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Railway: रेलवे नेटवर्क का 97 फीसदी ट्रैक का हो चुका है बिजलीकरण
Union Minister Ashwini Vaishnaw

Railway: भारतीय रेलवे कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य को हासिल करने के करीब है. वर्ष 2025 के अंत तक रेलवे जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल कर लेगा. जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेलवे डीजल की बजाय इलेक्ट्रिक से ट्रेनों का संचालन कर रहा है. रेलवे के संचालन और रखरखाव में भी ऊर्जा खपत को कम करने के विभिन्न उपायों पर काम किया जा रहा है. मौजूदा समय में रेलवे की 97 फीसदी लाइनों का बिजलीकरण हो चुका है. बचे तीन फीसदी रेलवे ट्रैक के बिजलीकरण का काम भी जल्द पूरा हो जायेगा. लोकसभा में रेल बजट के अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उपरोक्त बातें कही.

ऊर्जा की जरूरतों को ग्रीन ऊर्जा से पूरा करने की कोशिश 


रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे ऊर्जा की जरूरतों को ग्रीन ऊर्जा से पूरा करने की कोशिश कर रहा है. भारतीय परिवहन क्षेत्र को ग्रीन बनाने में रेलवे का सबसे अहम योगदान है. सड़क के मुकाबले रेलवे द्वारा काफी कम मात्रा में कार्बन उत्सर्जन हो रहा है. पिछले 10 साल में 34 हजार किलोमीटर नये रेलवे ट्रैक को बिछाया गया है और यह जर्मनी के रेल नेटवर्क से अधिक है. वहीं पुराने ट्रैक की जगह 50 हजार किलोमीटर नये ट्रैक को बिछाया गया है. रेलवे के आधुनिकीकरण का काम तेजी से चल रहा है. 


पिछले 10 साल में रेलवे ने पांच लाख रोजगार दिए

रेल मंत्री ने कहा कि पिछले 10 सालों में रेलवे ने पांच लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराया है और एक लाख रोजगार देने की प्रक्रिया चल रही है. लोको पायलटों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए रेस्ट रूम को आधुनिक बनाया गया है. वर्ष 2014 से पहले लोको पायलट के लिए रेस्ट रूम की हालत बेहद खराब थी, आज सभी 500 रेस्ट रूम में एयर कंडीशनर की सुविधा उपलब्ध है. ताकि लोको पायलट को आराम मिल सके. यही नहीं वर्ष 2014 से पहले किसी लोकोमोटिव में शौचालय की सुविधा नहीं थी, इससे महिला लोको पायलटों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. आज 1001 लोकोमोटिव में शौचालय की सुविधा है और नये डिजाइन के बनने वाले सभी लोकोमोटिव में यह सुविधा होगी. 

बजट में हर राज्य के हितों का रखा गया है ख्याल

राज्यों के साथ किसी तरह के भेदभाव को खारिज करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले उत्तर-पूर्व के लिए रेलवे का 2000 करोड़ का बजट था, जो अब बढ़कर 10400 करोड़ रुपये हो गया है. बिहार का एक हजार करोड़ का बजट अब बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये, झारखंड का 450 करोड़ रुपये से 7 हजार करोड़ रुपये हो गया है. पश्चिम बंगाल से लेकर हर राज्य में रेल बजट का आवंटन बढ़ा है. रेलवे बजट में हर राज्यों के हितों का ख्याल रखा गया है. ऐसे में भेदभाव के आरोप सरासर गलत है. 

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