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Home National उपराष्ट्रपति चुनाव में दिखेगा दक्षिण का दम, राधाकृष्णन और रेड्डी में किसकी दावेदारी कितनी मजबूत

उपराष्ट्रपति चुनाव में दिखेगा दक्षिण का दम, राधाकृष्णन और रेड्डी में किसकी दावेदारी कितनी मजबूत

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उपराष्ट्रपति चुनाव में दिखेगा दक्षिण का दम, राधाकृष्णन और रेड्डी में किसकी दावेदारी कितनी मजबूत
बायें विपक्ष के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी और दायें एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन

Radhakrishnan vs Sudershan Reddy: विपक्ष की ओर से अपना उम्मीदवार उतारने के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव काफी रोमांचक हो गया है. दोनों उम्मीदवारों (एनडीए के राधाकृष्णन और विपक्ष के बी सुदर्शन रेड्डी) की दावेदारी काफी मजबूत है. एक के पास राजनीति का काफी लंबा अनुभव है, तो दूसरा न्यायिक कार्यों के महारथी हैं. लेकिन चुनाव में जीत-हार तय करेगी, किसके पास कितना संख्या बल है. तो आइये जानते हैं कौन किसपर कितना भारी पड़ेगा.

उपराष्ट्रपति बनने के लिए कितने मतों की होती है जरूरत

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद मतदान करेंगे. इस प्रकार 782 सांसद चुनाव में हिस्स लेंगे. जिसमें लोकसभा के 542 और राज्यसभा के 240 सांसद मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे. बहुमत का आंकड़ा 392 है. यानी उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए उम्मीदवार को 392 का आंकड़ा लाना होगा.

किसकी दावेदारी कितनी मजबूत?

लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों वाले निर्वाचक मंडल में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास पर्याप्त बहुमत होने के कारण, राधाकृष्णन का निर्वाचन लगभग तय है. मौजूदा चुनाव में सत्ता पक्ष के समर्थन में कुल 427 सांसद बताए जा रहे हैं. जिसमें लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 134 सदस्य हैं. वहीं विपक्ष के पास 355 का संख्या बल है. जिसमें लोकसभा में 249 और राज्यसभा में 106 सदस्य हैं. बाकी बचे 133 सांसदों का समर्थन मायने रखेगा. दोनों ही पक्ष इनका वोट हासिल करने की कोशिश करेगा.

कैसे होता है उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव?

उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव गुप्त मतदान के जरिए होता है. यह एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली के आधार पर होता है. जिसमें मतदाता अपनी प्राथमिकता के क्रम में उम्मीदवारों को वोट देते हैं. जीत के लिए उम्मीदवार को कुल वैध मतों का साधारण बहुमत (50% + 1 ) प्राप्त करना होता है. यदि पहली गिनती में कोई उम्मीदवार बहुमत हासिल नहीं करता, तो कम मत वाले उम्मीदवारों को हटाकर उनकी प्राथमिकता के आधार पर मतों का पुनर्वितरण किया जाता है. ये प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक की उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिल जाती है.

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9 सितंबर को होगा उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव

उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होगा. इसके लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है. 22 अगस्त को नामांकन की जांच होगी. नाम वापस लेने की आखिरी तिथि 25 अगस्त है. 9 सितंबर को ही रिजल्ट भी आ जाएगा. NDA को निर्वाचक मंडल में पूर्ण बहुमत हासिल है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं. मुकाबले की स्थिति में सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवार की जीत तय है. जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने के कारण यह चुनाव कराना पड़ रहा है.

कौन हैं एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन?

एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन गौंडर जाति से ताल्लुक रखते हैं, जो तमिलनाडु में प्रभावशाली ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदाय है. राधाकृष्णन किशोरावस्था में ही आरएसएस और जनसंघ से जुड़ गए थे. वह 1990 के दशक के अंत में कोयंबटूर से दो बार लोकसभा चुनाव जीते और उनके समर्थक उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ कहते हैं. राधाकृष्णन 1998 और 1999 में दो बार जीत के बाद तमिलनाडु के कोयंबटूर से लगातार तीन लोकसभा चुनाव हार गए. हालांकि, कहा जाता है कि तमिलनाडु में सभी दलों में उनका बहुत सम्मान है, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा ने उन्हें कई राज्यों का राज्यपाल बनाया.

कई राज्यों के राज्यपाल रहे हैं राधाकृष्णन

सीपी राधाकृष्णन ने 31 जुलाई, 2024 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ ली. इससे पहले, उन्होंने लगभग डेढ़ साल तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया. झारखंड के राज्यपाल के रूप में, उन्हें तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था.

राधाकृष्णन के पास व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री

तमिलनाडु के तिरुपुर में 20 अक्टूबर, 1957 को जन्मे राधाकृष्णन के पास व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री है. राधाकृष्णन एक खिलाड़ी भी रहे हैं. टेबल टेनिस में वो कॉलेज चैंपियन और लंबी दूरी के धावक रहे हैं.

कौन हैं बी सुदर्शन रेड्डी?

विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं. वे 16 साल से अधिक समय तक संवैधानिक अदालतों में सेवाएं दे चुके हैं. जुलाई 1946 में जन्मे न्यायमूर्ति रेड्डी को दो मई, 1995 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया और बाद में पांच दिसंबर, 2005 को वह गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए. वह 12 जनवरी, 2007 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने और आठ जुलाई, 2011 को सेवानिवृत्त हुए. न्यायमूर्ति रेड्डी मार्च 2013 में गोवा के पहले लोकायुक्त बने थे, लेकिन सात महीने के भीतर ही निजी कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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