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Home National क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एस जयशंकर ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ हो जीरो टॉलरेंस

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एस जयशंकर ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ हो जीरो टॉलरेंस

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क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एस जयशंकर ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ हो जीरो टॉलरेंस
विदेश मंत्री एस जयशंकर

Quad Foreign Ministers Meeting : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा कि हमनें क्वाड के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की एक बहुत ही उपयोगी और सार्थक बैठक की. इस बैठक में विश्व की वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई. उन्होंने बैठक के बाद ज्वाइंट प्रेस काॅन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अलग-अलग छोर पर स्थित चार लोकतांत्रिक देशों के रूप में हमारे दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान काफी महत्वपूर्ण रहा.

समुद्री व्यापार के मुद्दे पर हुई बातचीत

एस जयशंकर ने ज्वाइंट पीसी में बताया कि हमने निर्बाध समुद्री व्यापार के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के महत्व को दोहराया. उन्होंने कहा कि चाहे आर्थिक गतिविधि हो या समुद्री व्यापार, आने वाले दिनों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर हमें सप्लाई चेन की मजबूती, संपर्क मार्गों में बाधा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों से निपटना होगा. एस जयशंकर ने कहा कि इनमें से हर मुद्दा साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देता है. उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबकुछ बेहतर हो यह क्वाड के सभी सदस्य देशों की जिम्मेदारी है. समुद्री क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है, जिसमें लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, समुद्र के नीचे केबल, ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग शामिल है. उन्होंने बताया कि हमने सुरक्षित और बिना रुकावट वाले समुद्री व्यापार पर भी बातचीत की और हमारा पक्का मानना ​​है कि आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

आपसी मेलजोल से क्वाड होगा मजबूत

एस जयशंकर ने कहा कि क्वाड देश खुले समाज की तरह हैं, जो विकास और खुशहाली के लिए हमारी नयी खोज और क्रिएटिविटी को बढ़ावा देते हैं. जब सदस्य देश ज्यादा सहयोग करेंगे, चाहे वह बिजनेस फोरम हो, हेल्थकेयर हो या डिजिटल एक्टिविटीज हों,तो स्थिति और बेहतर बनेगी. हमने आतंकवाद की समस्या पर भी ध्यान दिया है और इसके खतरे से निपटने को तत्पर भी हैं. आतंकवाद के लिए जीरो टॉलरेंस होना चाहिए और आतंकवादी हमलों का शिकार होने वाले देशों को अपनी रक्षा करने का अधिकार भी होना चाहिए.

क्षेत्रीय विकास के लिए क्वाड देशों को एक जैसा सोचना होगा

क्वाड विदेश मंत्रियों की मीटिंग के बाद जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने ज्वाइंट पीसी में कहा कि मैं क्वाड सहयोग की प्रगति देखकर बहुत खुश हूं. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात में एक बड़ा बदलाव आया है. इंडो-पैसिफिक के देशों को अपना भविष्य खुद तय करने के लिए अपनी मजबूती और क्षमता को मजबूत करना चाहिए. आज की मीटिंग ने हमें यह पक्का संदेश देने का अच्छा मौका दिया कि क्वाड इसके लिए जरूरी सहयोग को आगे बढ़ाएगा. उन्होंने कहा कि ईरान के हालात का इंडो-पैसिफिक इलाके पर बहुत अधिक असर पड़ रहा है, जिसमें एनर्जी सप्लाई का नजरिया भी शामिल है, हमने होर्मुज स्ट्रेट में फ्री और सेफ नेविगेशन पक्का करने के साथ-साथ मिडिल ईस्ट में स्टेबिलिटी लाने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशों के महत्व पर जोर दिया है.

क्या है क्वाड?

क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया इन चार देशों का एक रणनीतिक समूह है. इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार और सुरक्षा को बढ़ावा देना तथा किसी भी बाहरी दबाव को रोका जा सके.प्राकृतिक आपदा के समय भी ये सदस्य देश एक दूसरे की सहायता करते हैं. इसकी शुरुआत 2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के प्रस्ताव पर हुई थी.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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