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Home National PM Narendra Modi Speech : आतंकवाद को जड़ से मिटाना हमारा लक्ष्य, मणिपुर में भी स्थिति सामान्य हुई

PM Narendra Modi Speech : आतंकवाद को जड़ से मिटाना हमारा लक्ष्य, मणिपुर में भी स्थिति सामान्य हुई

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PM Narendra Modi Speech : आतंकवाद को जड़ से मिटाना हमारा लक्ष्य, मणिपुर में भी स्थिति सामान्य हुई

PM Narendra Modi Speech : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कांग्रेस पर जबरदस्त प्रहार किया है. प्रधानमंत्री का जवाब सुनने के बजाय पूरा विपक्ष राज्यसभा से वाॅक आउट कर गया, जिसकी पीएम और राज्यसभा के सभापति ने निंदा की. उसके बाद पीएम का संबोधन फिर शुरू हुआ, तो पीएम ने कहा कि मैं तो कर्तव्य से बंधा हुआ हूं, जिस मुद्दे पर इतनी चर्चा हुई, उसका जवाब भी विपक्ष सुन नहीं पाया. पीएम मोदी ने कहा- मैं यहां कोई राजनीतिक ‘स्कोर’ करने नहीं आया हूं, देश की जनता को हिसाब देना मैं अपना कर्तव्य मानता हूं. इससे पहले पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष जनादेश को समझ नहीं पाया. हमें तीसरी बार देश की सेवा करने का मौका मिला है. देश की जनता ने हमें आशार्वाद दिया है. इस चुनाव में जनता ने प्रोपेगंडा को परास्त किया है और परफार्मेंस को विजय दिलाई है.

आतंकवाद से लड़ाई अंतिम चरण में

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जल्दी ही उन्हें जड़ से मिटा दिया जाएगा. मणिपुर हिंसा पर पीएम मोदी ने कहा कि हम वहां स्थिति सामान्य करने में जुटे हैं, जल्दी ही वहां स्थिति बदलेगी. मणिपुर में अबतक 500 लोगों को गिरफ्तार किया चुका है, विपक्ष ने मणिपुर के मसले पर साथ नहीं दिया, जबकि उनके शासनकाल में वहां ज्यादा परेशानी थी. मणिपुर में स्कूल दफ्तर अब खुल रहे हैं, गृहमंत्री खुद वहां कई दिनों तक रूके थे.

कांग्रेस अब परजीवी युग में है

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का परजीवी युग शुरू हो गया है. इसी युग में कांग्रेस का आंकड़ा 99 तक पहुंचा है. ये अपने सहयोगियों के दम पर इस आंकड़े तक पहुंचे हैं, अन्यथा उनका इससे भी बुरा हाल होता. परजीवी कांग्रेस अब अपने सहयोगियों को ही खा जाएगी, यही परजीवी का स्वभाव है.

संविधान बचाने के लिए 1977 में चुनाव हुआ था, जिसे हम जीते थे

पीएम मोदी ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान हजारों लोगों को यातनाएं दी गईं. किस संविधान ने संवैधानिक पदों के ऊपर एक परिवार के लोगों को रखने की अनुमति दी थी? प्रधानमंत्री पद के ऊपर एनएसी को बैठाने की अनुमति विपक्ष को किस संविधान ने दी थी, किस संविधान ने एक सांसद को कैबिनेट के निर्णय को सार्वजनिक रूप से फाड़ने की अनुमति दी थी. क्या यह सबकुछ संविधान का सम्मान है. संविधान को बचाने के लिए हमने 1977 में चुनाव लड़ा था और जीते थे. 

इमरजेंसी में संविधान की धज्जियां उड़ाने वाले हमें सीख दे रहे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जनता को यह भरोसा था कि हम संविधान की रक्षा करेंगे, इसलिए उन्होंने हमें जनादेश दिया. इमरजेंसी के दौरान संविधान की धज्जियां उड़ाने वाले संविधान की बात करते हुए अच्छे नहीं दिखते हैं. जिन्होंने संविधान की मर्यादाओं को तार-तार किया वे हमें बता रहे हैं कि संविधान की रक्षा कैसे होगी. आज जय संविधान कह रहे हैं और संविधान की प्रतियां लहरा रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी संविधान की सबसे बड़ी विरोधी है. इमरजेंसी के दौरान

बंगाल में अभद्रता पर विपक्ष चुप है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी राज्य की बात नहीं कर रहा हूं, लेकिन जब बंगाल में एक महिला के साथ अत्याचार हुआ, सड़क पर उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ, तो उसकी चीख सुनकर भी कोई उसकी मदद के लिए नहीं आया, बल्कि लोग उसका वीडियो बनाते रहे. यह घटना उस राज्य में हुई जहां की मुख्यमंत्री एक महिला है और जिसका बहुत सम्मान है, बावजूद इसके पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर चुप रहा.

हम महिलाओं के नेतृत्व में विकास पर जोर दे रहे : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष चर्चा में सिर्फ अपनी कहना चाहता है इसलिए वे मेरा जवाब सुन ना सके और मैदान छोड़कर भाग गए. हमने महिलाओं के नेतृत्व में विकास पर बल दिया है. हमने किसानों और विश्वकर्मा समुदाय के लोगों के लिए काम किया. हमने रेहड़ी वालों को लोन दिलाया. किसानों को हमने पिछले दस साल में तीन लाख करोड़ रुपया दिया है.

राज्यसभा के सभापति ने विपक्ष के वाॅक आउट की निंदा की

पीएम मोदी के संबोधन के वक्त पूरे विपक्ष ने कांग्रेस की अगुवाई में जब सदन से वाॅक आउट किया तो राज्यसभा के सभापति ने पीएम मोदी को रोकर विपक्ष के व्यवहार की निंदा की. उन्होंने कहा कि यह देश की जनता का अपमान है. नेता प्रतिपक्ष को मैंने कल बिना रोक-टोक के बोलने का अवसर दिया था. आज वे पीएम मोदी का संबोधन सुन नहीं पाए और संसदीय परंपराओं की अनदेखी करके मुझे पीठ दिखाकर यहां से चले गए. उन्होंने मुझे पीठ नहीं दिखाया है, सत्ता पक्ष का अपमान नहीं किया है, बल्कि संविधान और संसदीय परंपराओं का अपमान किया है.

विपक्ष का हंगामा जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बीच विपक्ष का हंगामा जारी रहा. पीएम मोदी ने शोर-शराबे के बीच ही यह कहा कि हमारे लिए संविधान कुछ नियम कायदों का संकलन नहीं है, हम उसके एक-एक शब्द पर भरोसा करते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है. विपक्ष पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि झूठ फैलाने वालों के अंदर सच सुनने की ताकत नहीं है. उन्होंने कहा कि विपक्ष उच्च सदन की परंपराओं का अपमान कर रहे हैं. पीएम मोदी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि मैदान छोड़कर भाग जाना ही विपक्ष की किस्मत है. पीएम मोदी ने कहा कि जनता ने इन्हें इतनी बुरी तरह पराजित किया है कि इनके पास चीखने-चिल्लाने और नारेबाजी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.

विपक्ष कुछ करने में विश्वास नहीं करता, हमें परिश्रम में विश्वास

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चुनाव 10 वर्ष की सिद्धियों पर तो मुहर लगाता ही है, भविष्य के संकल्पों के लिए भी देश की जनता ने हमें चुना है. उन्होंने कहा कि हम अपने परिश्रम से देश को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएंगे. आने वाला यह पांच वर्ष गरीबों के नाम रहेगा, हम उनके कल्याण के लिए काम करेंगे. यह पांच वर्ष गरीबी के खिलाफ लड़ाई के लिए रहेंगे.

बाबा साहेब के संविधान ने हमें सेवा का अवसर दिया

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बाबा साहेब के संविधान की खूबी है कि हमें लगातार 10 साल जनता की सेवा करने का मौका मिला. हमारा संविधान हमारे लिए लाइट हाउस का काम करता है, वह हमारा मार्गदर्शक है. जब हमने 26 को संविधान बनाने की घोषणा की थी, तो वे लोग जो सदन में संविधान दिखाते रहते हैं, उन्होंने इसका विरोध किया था. हमारी कोशिश यह है कि संविधान के प्रति सबका सम्मान और जानकारी रहे. हम यह चाहते हैं कि देश के कोने-कोने में संविधान की भावना को पहुंचाया जाए. मंगलवार को लोकसभा में चर्चा का जवाब दिया था. पीएमओ ने इस संबंध में एक्स पर एक पोस्ट लिखकर जानकारी दी है. वे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेंगे. राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत 28 जून को बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी ने की थी.


उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम मोदी का संबोधन नीट परीक्षा, मुद्रास्फीति और अग्निवीर योजना जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा. विपक्ष मंगलवार को यूपी के हाथरस में हुई दुर्घटना का मुद्दा भी उठा सकता है. प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जबरदस्त हमला बोला था और उन्हें बालक बुद्धि का बताया था. उन्होंने कहा कि वे ओबीसी वर्ग के लोगों को चोर बता चुके हैं, वे यह भूल चुके हैं कि वे जमानत पर बाहर हैं. संभावना जताई जा रही है कि वे आज भी कांग्रेस पार्टी =पर हमलावर रहेंगे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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