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Home Badi Khabar PM मोदी ने किया Mission LiFE का शुभारंभ, कहा- क्लामेट चेंज को सिर्फ पॉलिसी मेकिंग पर नहीं छोड़ा जा सकता

PM मोदी ने किया Mission LiFE का शुभारंभ, कहा- क्लामेट चेंज को सिर्फ पॉलिसी मेकिंग पर नहीं छोड़ा जा सकता

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PM मोदी ने किया Mission LiFE का शुभारंभ, कहा- क्लामेट चेंज को सिर्फ पॉलिसी मेकिंग पर नहीं छोड़ा जा सकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के केवड़िया में मिशन लाइफ (Mission LiFE) का शुभारंभ किया. इस मिशन का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को अपनाना है. इसका फायदा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकना है, ताकि प्रकृति की रक्षा की जा सके.

पर्यावरण की रक्षा हर व्यक्ति का दायित्व

मिशन लाइफ की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण की रक्षा के लिए व्यक्तिगत प्रयास करेगा, इस कामना के साथ ही मैं आज ये मिशन लाइफ का विजन दुनिया के सामने रख रहा हूं. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज हमारे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, नदियां सूख रही हैं. मौसम में काफी बदलाव आ गया है और यह एक तरह से अनिश्चित हो गया है. प्रकृति में आये ये बदलाव हमें सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि क्लामेट चेंज को सिर्फ पॉलिसी मेकिंग पर नहीं छोड़ा जा सकता है.


क्लाइमेट चेंज के बदलाव आसपास महसूस हो रहे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि क्लाइमेट चेंज से जो बदलाव आ रहे हैं, उसे हर आम आदमी अपने आस-पास महसूस कर रहा है. पिछले कुछ दशकों में क्लाइमेंट चेंज से कई दुष्प्रभाव हमें दिख रहे हैं और यह तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें अतिवृष्टि-अनावृष्टि सबसे प्रमुख है.

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क्या है मिशन लाइफ

मिशन लाइफ एक अभियान है. जो इस धरती की रक्षा के लिए आम लोगों को जोड़ने का काम करता है. यह आम लोगों को एक साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए जिम्मेदार बनाने का प्रयास है. मिशन लाइफ, क्लाइमेट चेंज के खिलाफ लड़ाई को लोकतांत्रिक बनाता है, जिसमें हर कोई अपने सामर्थ्य के हिसाब से योगदान दे सकता है. मिशन लाइफ का उद्देश्य लोगों के लाइफस्टाइल में बदलाव लाना है, ताकि इस धरती को बचाया जा सके.

सीओपी-27 का अगले महीने आयोजन

ज्ञात हो कि अगले महीने संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु के मुद्दे पर विशाल बैठक का आयोजन कर रहा है. मिशन लाइफ में जीवनशैली में बदलाव के लिए अनेक सुझाव दिये गये हैं, जो जलवायु के अनुकूल होंगे. इस मिशन का उद्देश्य आम लोगों को पर्यावरण की रक्षा के लिए तीन रणनीतियों की ओर मोड़ना है जिनमें पर्यावरण के अनुकूल आचरण, उद्योगों और बाजार को बदलती मांग के तहत बदलाव करना एवं सरकार एवं औद्योगिक नीतियों को प्रभावित करना शामिल है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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