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Home National PM Modi Mann Ki Baat : पीएम मोदी ने अगस्त को बताया गौरव से जुड़ा महीना, बिहार के नवीन और झारखंड के ओमप्रकाश की तारीफ की

PM Modi Mann Ki Baat : पीएम मोदी ने अगस्त को बताया गौरव से जुड़ा महीना, बिहार के नवीन और झारखंड के ओमप्रकाश की तारीफ की

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PM Modi Mann Ki Baat : पीएम मोदी ने अगस्त को बताया गौरव से जुड़ा महीना, बिहार के नवीन और झारखंड के ओमप्रकाश  की तारीफ की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मन की बात

PM Modi Mann Ki Baat 124th Episode : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 124वें एपिसोड में अंतरिक्ष से वापस लौटे शुभांशु शुक्ला की तारीफ की और कहा कि शुभांशु शुक्ला की वापसी से देश को खुशी तो मिली ही, पूरा देश गर्व से भर गया. उन्होंने कहा कि अगस्त का महीना शुरू होने वाला है और अगस्त का महीना हमारे देश के लिए बहुत खास है. अगस्त के महीने में ही देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था. यह महीना है देश के प्रति अपने प्रेम को प्रदर्शित करने का और उन योगदानों को याद करने का जिनकी बदौलत देश आजाद हुआ. उन योगदानों पर गर्व करने का.

देश के लिए कुर्बान होने वालों पर गर्व करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लिए कुर्बान होने वालों पर गर्व करने की बात कही. मन की बात में उन्होंने कहा कि खुदी राम बोस जैसे युवा जब देश के लिए शहीद हुए तो उनकी उम्र महज 18 वर्ष थी. वे जब फांसी पर चढ़े तो उनके मन और चेहरे पर डर नहीं था, गर्व का भाव था. अगस्त का महीना ऐसे ही गर्व के पलों से भरा है. एक अगस्त को देश पर कुर्बान होने वाले बालगंगाधर तिलक की पुण्यतिथि है. भारत छोड़ो आंदोलन भी अगस्त के महीने में ही शुरू हुआ था. अगस्त में ही हमने विभाजन की विभाषिका भी झेली थी, जिसकी याद में हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाते हैं.

हैंडलूम उद्योग ने काफी तरक्की की है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह वर्ष हमारे लिए कई चीजें ऐसी लेकर आया है, जिनपर हम गर्व कर सकते हैं. इनमें से एक है मराठा साम्राज्य के 12 किलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित करना. हैंडलूम उद्योग भी आज काफी तरक्की कर रहा है. प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र की पैठणी साड़ियों की चर्चा की. उन्होंने महाराष्ट्र के पैठण गांव की कविता धवले की चर्चा की, जो पैठणी साड़ियों के जरिए आज तीन गुणा ज्यादा कमा रही हैं. उन्होंने बताया कि कविता धवले एक कमरे में काम करती थीं, लेकिन सरकार के सहयोग से उनकी आय बढ़ी. मयूरभंज की आदिवासी महिलाओं ने संताली साड़ियों के कारोबार को पुनर्जीवित किया. बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले नवीन कुमार की चर्चा भी उन्होंने की, जिनका पूरा परिवार हथकरघा उद्योग से जुड़ा है और अब उनकी नई पीढ़ी इस उद्योग में आधुनिकता का पुट डाल रही है. वे टैक्सटाइल डिजाइिंग का कोर्स कर रहे हैं.

गुमला के ओम प्रकाश साहू की भी पीएम ने की चर्चा

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश लगातार बदल रहा है और प्रगति के पथ पर अग्रसर है. झारखंड के गुमला जिले के बसिया प्रखंड का पीएम ने जिक्र किया, जो कभी नक्सलवाद की वजह से जाना जाता था. लेकिन आज यह क्षेत्र मछली पालन के लिए प्रसिद्ध है. उन्होंने प्रखंड के ओम प्रकाश साहू का जिक्र किया, जिन्होंने मछली पालन को रोजगार बनाया और क्रांति ला दी. आज यहां 150 से ज्यादा परिवार मछली पालन से जुड़ा है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारी संस्कृति के लोकगीतों के जरिए भी भी कई प्रगतिशील कार्य किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि ओडिशा के क्योंझर जिले में एक भजन मंडली है राधा कृष्णा संकीर्तन जो लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही है. पीएम मोदी ने कहा कि देश लगातार उन्नति कर रहा है और उसपर हमें गर्व करना चाहिए.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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