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Home National पोंगल मनाने  लोगनाथन मुरुगन के घर पहुंचे PM मोदी, मकर संक्रांति पर देशवासियों के नाम खास पत्र

पोंगल मनाने  लोगनाथन मुरुगन के घर पहुंचे PM मोदी, मकर संक्रांति पर देशवासियों के नाम खास पत्र

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पोंगल मनाने  लोगनाथन मुरुगन के घर पहुंचे PM मोदी, मकर संक्रांति पर देशवासियों के नाम खास पत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो

देशभर में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है.  इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं.  साथ ही उन्होंने सभी को माघ बिहू और उत्तरायण की शुभकामनाएं भी दीं.  इस अवसर पर तिल और गुड़ को भारतीय संस्कृति का हिस्सा बताया और सूर्यदेव से सभी का कल्याण करने की प्रार्थना की.  

प्रधानमंत्री ने देशवासियों ने नाम लिखा पत्र 

पीएम मोदी ने देशवासियों को पत्र लिखकर मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, “संक्रांति आशा और सकारात्मकता का प्रतीक है, जब सूर्य की गति नए बदलावों का संकेत देती है। पूरे देश में अलग-अलग रूपों में, लेकिन उसी उत्साह के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार हमारी सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि को दर्शाता है और हमें उस एकजुटता की भावना की याद दिलाता है जो हम सभी को एक साथ बांधती है।”

पीएम मोदी ने किसान और उनके परिवारों के त्योहार का विशेष महत्व बताते हुए लिखा, “यह त्योहार हमारे किसानों और उनके परिवारों के जीवन में भी एक विशेष स्थान रखता है। यह उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है जो हमें पोषण देते हैं, जिससे हमारा समाज मजबूत होता है। संक्रांति हमें आत्मविश्वास और आशावाद के साथ आगे देखने के लिए प्रेरित करती है। यह वर्ष समृद्धि, सकारात्मकता और अच्छे स्वास्थ्य से भरा हो। आपके घर में खुशियां हों, आपके सभी प्रयासों में सफलता मिले और समाज में सद्भाव बना रहे।”

पीएम मोदी ने देशवासियों को पोंगल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, “पोंगल के शुभ अवसर पर मैं आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। यह विशेष त्योहार हमें श्रम और प्रकृति की लय के बीच घनिष्ठ संबंध की याद दिलाता है। यह एक ऐसा त्योहार है जो कृषि, हमारे मेहनती किसानों, ग्रामीण जीवन और काम की गरिमा से गहराई से जुड़ा हुआ है। परिवार एक साथ मिलकर पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और खुशी और सद्भावना साझा करते हैं। यह पीढ़ियों के बीच संबंधों को मजबूत करता है और एकजुटता की भावना को पुष्ट करता है। पोंगल उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का भी अवसर है जो अपनी कड़ी मेहनत से हमारे जीवन को समृद्ध बनाते हैं।”

उन्होंने पोंगल को तमिल परंपराओं का उज्ज्वल प्रतीक बताते हुए कहा, “हम भारत में इस बात पर गर्व करते हैं कि हम दुनिया की सबसे पुरानी भाषा, तमिल के घर हैं। यह देखकर खुशी होती है कि पोंगल एक वैश्विक त्योहार के रूप में उभर रहा है। यह तमिलनाडु में, भारत के विभिन्न हिस्सों में और दुनिया भर में तमिल समुदाय द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। एक बार फिर, आपको पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्योहार सभी के जीवन में प्रचुर समृद्धि, सफलता और अच्छा स्वास्थ्य लाए।”

पीएम मोदी ने माघ बिहू की शुभकामनाएं देते हुए पत्र में लिखा, “असमिया संस्कृति का सबसे अच्छा प्रतीक, यह सुंदर त्योहार वास्तव में खुशी, गर्मजोशी और भाईचारे का अवसर है। माघ बिहू का सार संतोष और कृतज्ञता में निहित है। यह फसल के मौसम के खत्म होने का प्रतीक है और उन लोगों की मेहनत की सराहना करने का मौका देता है जो हमारी जिंदगी को बेहतर बनाते हैं, खासकर हमारे मेहनती किसानों की। यह हमारे बीच उदारता और देखभाल को भी बढ़ावा देता है। यह माघ बिहू सभी के जीवन में शांति, अच्छे स्वास्थ्य और खुशियां लाए। मैं कामना करता हूं कि आने वाला साल समृद्धि और सफलता से भरा हो।”

पीएम मोदी ने क्या कहा ? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज पोंगल एक ग्लोबल त्योहार बन गया है. दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्यार करने वाले लोग इसे उत्साह से मनाते हैं. मैं भी उनमें से एक हूं. आप सभी के साथ यह खास त्योहार मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. पोंगल हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में एक सुखद अनुभव है. यह खाना देने वाले, धरती और सूरज की कड़ी मेहनत के प्रति आभार जताने का एहसास है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया की लगभग सभी सभ्यताएं फसलों से जुड़ा कोई न कोई त्योहार मनाती हैं. तमिल संस्कृति में किसान को जीवन की नींव माना जाता है. हमारे किसान राष्ट्र निर्माण में मजबूत भागीदार हैं. आत्मनिर्भर भारत अभियान को उनके प्रयासों से बहुत ताकत मिल रही है. केंद्र सरकार भी किसानों को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है. 

देशभर में मनाया जा रहा त्योहार 

आज देश के अलग-अलग कोने में अलग-अलग त्योहार मनाया जा रहा है. 14 जनवरी को भारत के अलग-अलग राज्यों में फसल और सूर्य से जुड़े महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं. इस दिन सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है, इसलिए इसे देशभर में शुभ माना जाता है.

तमिलनाडु में इस दिन पोंगल मनाया जाता है, जो नई फसल के लिए धन्यवाद देने का चार दिन का उत्सव है. पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी मनाई जाती है, जहां आग जलाकर सर्दी के अंत और अच्छी फसल की खुशी जताई जाती है. गुजरात में उत्तरायण के नाम से मकर संक्रांति का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है और पतंगबाजी इसका सबसे बड़ा आकर्षण होती है. 

राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक समेत कई राज्यों में इसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, जहां तिल-गुड़ खाने, दान-पुण्य करने और पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है. महाराष्ट्र में लोग तिलगुल देकर “गोड गोड बोला” कहकर आपसी मिठास का संदेश देते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे खिचड़ी पर्व के रूप में जाना जाता है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संक्रांति तीन दिन तक चलने वाला फसल उत्सव है, जिसमें घरों को सजाया जाता है और ग्रामीण परंपराएं निभाई जाती हैं. वहीं केरल में 14 जनवरी को मकरविलक्कु या मकर ज्योति का पर्व मनाया जाता है, जिसका विशेष महत्व सबरीमला में भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए होता है. कुल मिलाकर, 14 जनवरी पूरे भारत में अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ फसल, सूर्य और खुशहाली का पर्व है.

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