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Patanjali Advertisement Case: उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

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Patanjali Advertisement Case: उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
Baba Ramdev/ File Photo

Patanjali Advertisement Case: सुप्रीम कोर्ट में पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले की सुनवाई आज हुई. सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव और बालकृष्ण कोर्ट भी मौजूद थे. सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के वकील से प्रत्येक अखबार के मूल पृष्ठ को रिकॉर्ड में दाखिल करने को कहा है जिसमें सार्वजनिक माफी जारी की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख के लिए योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई न करने के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को फटकार लगायी.

इससे पहले 23 अप्रैल को मामले की सुनवाई हुई जिसमें योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) बालकृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनकी ओर से भ्रामक विज्ञापन मामले में हुई गलतियों के लिए समाचार पत्रों में बिना शर्त माफी प्रकाशित करने का काम किया जा चुका है.

उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण से कहा कि यदि आप सहानुभूति चाहते हैं तो अदालत के प्रति ईमानदार रहें. शीर्ष कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण से पूछा कि हमारी मुख्य चिंता यह है कि क्या आपने कानून के अनुसार कार्रवाई की. उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा दिए स्पष्टीकरण पर कोर्ट ने असंतोष जताया और कहा कि ऐसा लगता है कि उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने 10 अप्रैल के उसके आदेश के बाद ही कार्रवाई की.

बाबा रामदेव ने नहीं दिया मीडिया के सवालों का जवाब

सुनवाई के बाद योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के सीएमडी आचार्य बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट से जब बाहर निकले तो मीडिया के लोगों ने उनसे कुछ सवाल किया, लेकिन रामदेव ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के कोर्ट से बाहर निकलने का वीडियो सामने आया है जिसे न्यूज एजेंसी एएनआई ने जारी किया है.

क्या हुआ था पिछली सुनवाई के दौरान

पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने रामदेव और बालकृष्ण के वकील से समाचार पत्रों में प्रकाशित माफीनामे को दो दिनों के भीतर रिकॉर्ड में पेश करने का आदेश दिया था. वहीं, रामदेव और बालकृष्ण की ओर से पेश वकील ने पीठ को जानकारी दी थी कि वे अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए अतिरिक्त विज्ञापन भी जारी करने का काम जल्द करेंगे. इसके बाद पीठ ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 30 अप्रैल यानी आज की तारीख तय की.

क्या है पूरा मामला

यहां चर्चा कर दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण को 16 अप्रैल को हिदायत दी थी. कोर्ट ने कहा था कि वे एलोपैथी को नीचा दिखाने का कोई प्रयास नहीं करें. कोर्ट की ओर से उन्हें पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के भ्रामक विज्ञापन के मामले में एक सप्ताह के अंदर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और पछतावा प्रकट करने की अनुमति प्रदान की थी. शीर्ष अदालत 2022 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. इसमें कोविड वैक्सीन और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ एक दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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